o प्वाइंटर- मध्यम और शीघ्र पकने वाली धान की फसलों से जल निकासी जरूरी
भाटापारा। मध्यम अवधि वाली धान की फसलों के बचाव के लिए फौरन जल निकासी की व्यवस्था करनी होगी जबकि दीर्घ अवधि वाली धान की प्रजातियों के लिए वरदान है यह बारिश लेकिन खेतों में जल भराव 4 इंच से ज्यादा नहीं रखने की सलाह कृषि वैज्ञानिकों ने दी है। खरीफ की तैयार होती फसल के बीच अब हो रही बारिश किसानों की चिंता बढ़ा रही है।जल जमाव और फसल डूब के ख़तरों को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जरुरी सलाह देते हुए इस पर फौरन अमल का आग्रह किया गया है ताकि डूब से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
जल निकास की व्यवस्था जरुरी:
पुष्पन और दूध भराई के बाद अब दाने परिपक्वता की अवधि में आ चुके हैं लेकिन तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश के बाद अब संकट में हैं शीघ्र तैयार होने वाली धान की प्रजातियां। इसलिए कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसे क्षेत्र के किसानों को जलभराव से होने वाले नुकसान को लेकर अतिरिक्त जल निकासी की व्यवस्था फौरन करने की सलाह दी है।
सरना किसानों को यह सलाह:
सरना की फसल ले रहे किसानों को खेतों में जलभराव 4 इंच से ज्यादा नहीं रखने की सलाह कृषि वैज्ञानिकों ने देते हुए कहा है कि अतिरिक्त जल भराव नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जल निकासी की व्यवस्था अभी से पक्की करें क्योंकि डूब के घेरे में आ सकती है सरना की फसल। ऐसी ही सावधानी मध्यम अवधि में तैयार होने वाली धान की प्रजातियों के लिए भी रखनी होगी।
कटाई में आएगी यह दिक्कत:
बीते चार दिनों से हो रही रही बरसात फसल कटाई की राह में भी बड़ी बाधा बन सकती है।जल भराव और जल निकासी के बाद भी खेतों में नमी बनी रहेगी। इससे हार्वेस्टर और थ्रेशर की पहुंच खेतों तक आसान नहीं होगी। कुछ ऐसी ही परेशानी खलिहानों में भी आना संभव है क्योंकि वहां भी जल जमाव हो चुका है।
ध्यान रखें जल निकास पर:
वर्तमान बारिश धान की फसल के लिए स्थिति के अनुसार लाभकारी और नुकसान दायक दोनों हो सकती है। मध्यम एवं शीघ्र पकने वाली प्रजाति अतिरिक्त पानी के जमाव की वजह से खतरे में आ सकती है इसलिए अतिरिक्त पानी के निकासी की व्यवस्था तत्काल करनी होगी। लंबी अवधि वाली धान की प्रजातियों के लिए यह बारिश लाभदायक है लेकिन खेतों में अनावश्यक जल भराव ना रखें।
-डॉ एस आर पटेल, रिटायर्ड साइंटिस्ट (एग्रोनॉमी), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर।
