रायपुर। राजधानी में एक सर्राफा कारोबारी के लग्जरी वाहनों के काफिले के साथ पुलिस की सफेद स्कॉर्पियो चलने का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो में कारोबारी कार्तिक गिरि के काफिले के आगे पुलिस वाहन दिखाई दे रहा है। वहीं, काफिले में शामिल कुछ लोग चलती गाडिय़ों की खिड़कियों से बाहर निकलकर स्टंट करते नजर आ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निजी काफिले को पुलिस की पायलटिंग क्यों
वीडियो सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक निजी कारोबारी के काफिले के साथ पुलिस वाहन किस आधार पर लगाया गया था। क्या कारोबारी को किसी तरह का सुरक्षा खतरा था? क्या इसके लिए विभाग की ओर से सुरक्षा आकलन किया गया था और सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई थी?
आमतौर पर पुलिस वाहन और जवानों की तैनाती कानून-व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा और अधिकृत सुरक्षा जरूरतों के लिए की जाती है। ऐसे में निजी काफिले के आगे पुलिस वाहन की मौजूदगी ने इसकी आधिकारिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस वाहन की तैनाती का रिकॉर्ड कहां?
विभाग से यह स्पष्ट करने की अपेक्षा की जा रही है कि संबंधित कारोबारी को किस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। पुलिस वाहन किस अधिकारी के निर्देश पर भेजा गया और क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी हुआ था? यदि यह अधिकृत सुरक्षा व्यवस्था थी तो उसका आधार और तैनाती का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं, यदि बिना अनुमति सरकारी वाहन और पुलिसकर्मियों का इस्तेमाल किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
चलती गाडिय़ों में स्टंट, पुलिस की निगरानी पर सवाल
इस घटनाक्रम का दूसरा गंभीर पहलू यातायात नियमों से जुड़ा है। वीडियो में काफिले के कुछ लोग चलती गाडिय़ों से बाहर निकलकर स्टंट करते दिखाई दे रहे हैं। सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह की गतिविधियां अन्य वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा पैदा कर सकती हैं। ऐसे में सवाल है कि जब काफिले के आगे पुलिस की गाड़ी मौजूद थी, तब इन गतिविधियों को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की गई? क्या पुलिसकर्मियों ने इस तरह के स्टंट पर ध्यान नहीं दिया या फिर यातायात नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज किया गया?
पुलिस लाइन के आरआई के बयान से बढ़ी चर्चा
मामले में पुलिस लाइन के आरआई की ओर से घटनाक्रम की जानकारी नहीं होने की बात सामने आने के बाद पुलिस वाहन की तैनाती को लेकर सवाल और बढ़ गए हैं। यदि पुलिस वाहन आधिकारिक आदेश पर भेजा गया था तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? वहीं, यदि तैनाती अनधिकृत थी तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
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आम नागरिकों पर कार्रवाई, फिर इस मामले में क्या होगा?
रायपुर में यातायात पुलिस नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार चालानी कार्रवाई करती है। ऐसे में पुलिस वाहन के साथ चल रहे काफिले में स्टंट का वीडियो सामने आने के बाद लोगों की नजरें अब विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या वीडियो के आधार पर संबंधित वाहन चालकों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी? क्या पुलिस वाहन की तैनाती और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल की आंतरिक जांच होगी?
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस कमिश्नरेट की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण और जांच का इंतजार है। अब देखना होगा कि विभाग इस घटनाक्रम को कितनी गंभीरता से लेता है और पुलिस वाहन की तैनाती से लेकर यातायात नियमों के उल्लंघन तक की जिम्मेदारी किस तरह तय करता है।
