जगदलपुर। दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन के समापन के बाद विभिन्न राज्यों से आए सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बस्तर के प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का भ्रमण किया। यहां स्थानीय जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक गौर नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। सिर पर गौर के सींगों से सजे मुकुट और कौड़ियों की मालाओं के साथ कलाकारों ने मांदरी और ढोल की थाप पर शानदार प्रस्तुति दी। लोकनृत्य की ऊर्जा और सांस्कृतिक रंगों ने अधिकारियों को प्रभावित किया। कई प्रतिनिधियों ने इस अनूठी प्रस्तुति को अपने मोबाइल और कैमरों में भी कैद किया।
इंद्रावती नदी पर स्थित चित्रकोट जलप्रपात की ऊंचाई से गिरती दूधिया जलधारा और उसकी गूंज ने आगंतुकों को आकर्षित किया। अधिकारियों ने अलग-अलग व्यू-पॉइंट से जलप्रपात, नदी और आसपास की घाटी की प्राकृतिक सुंदरता का अवलोकन किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर अपनी खनिज संपदा और जंगलों के साथ समृद्ध लोककला, जनजातीय संस्कृति और इको-टूरिज्म के लिए भी खास पहचान रखता है। उन्होंने स्थानीय वनोपज और पर्यटन को सहकारिता के माध्यम से राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। अधिकारियों ने बस्तर के प्राकृतिक वैभव और स्थानीय लोगों के आतिथ्य की सराहना की।
भ्रमण के दौरान भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी, छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता सचिव सीआर प्रसन्ना, कमिश्नर डोमन सिंह, सहकारी संस्थाओं के पंजीयक रमेश शर्मा, कलेक्टर आकाश छिकारा सहित केंद्र और विभिन्न राज्यों के अधिकारी तथा सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
