दुर्ग। नई दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ – देश बचाओ’ महारैली में उमड़े जनसैलाब को लेकर दिल्ली प्रवास से लौटे छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा ने कहा -1 नवंबर 2026 की तारीख भारतीय लोकतंत्र के संघर्ष और जनभागीदारी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगी। प्रेस से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जी के नेतृत्व में रामलीला मैदान में जो दृश्य दिखाई दिया, वह पिछले तीन दशकों में देखने को नहीं मिला। देश के कोने-कोने से लोग वोट चोरी के खिलाफ जारी लड़ाई को अपना समर्थन देने दिल्ली पहुँचे। 19 विपक्षी दलों के राष्ट्रीय नेताओं, अध्यक्षों, जनप्रतिनिधियों और हजारों कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने INDIA गठबंधन की एकजुटता को प्रदर्शित किया। छत्तीसगढ़ से भी हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस महारैली में हिस्सा लिया।
वोरा ने अपने दिल्ली प्रवास का अनुभव साझा करते हुए बताया कि 1 नवंबर को दिल्ली पहुँचे लोगों ने बाजारों में खरीदारी कर स्थानीय व्यापारियों को लाभ पहुँचाया। उन्होंने स्वयं कनॉट प्लेस में मिठाइयाँ खरीदीं।उन्होंने कहा कि आयोजन से पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि महारैली के कारण दिल्ली के व्यापारियों को नुकसान होगा।
वोरा ने कहा कि वोट नागरिक की लोकतांत्रिक पहचान है।जब किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है, तो उसके मताधिकार पर सीधा असर पड़ता है।वोरा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को उनके मताधिकार से वंचित किए जाने का खतरा पैदा हुआ है। और इस विषय पर निर्वाचन आयोग को स्पष्टता देनी चाहिए।भाजपा सरकार ने सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग किया है और देश की संपत्ति चंद उद्योगपतियों के हाथों में सिमटती जा रही है।
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वोरा ने आगे कहा कि राहुल गांधी जी के साथ आज पूरा देश इस लड़ाई में खड़ा है। जनता का यह आक्रोश आने वाले समय में सत्ता परिवर्तन का आधार बनेगा। रामलीला मैदान से उठी आवाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक जनता का संदेश पहुँचा दिया है। विपक्ष का यह प्रयास उन्हें जवाबदेही से बचने नहीं देगा।
