ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जी दस्तावेज देकर लाखों की ठगी, मुख्य आरोपी कोरबा से गिरफ्तार, दो आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल
रायगढ़। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी को रायगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। आरोपी पर ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती में चयन कराने के लिए फर्जी 10वीं की अंकसूची उपलब्ध कराने और अभ्यर्थियों से लाखों रुपये ठगने का आरोप है। मामले में दो अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस के अनुसार, मामला वर्ष 2023 की ग्रामीण डाक सेवक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि जिला सक्ती निवासी नरेंद्र कुमार और जांजगीर-चांपा निवासी सोनम साहू ने फर्जी 10वीं की अंकसूची के आधार पर ऑनलाइन आवेदन किया था। दोनों का चयन रायगढ़ डाक संभाग के अंतर्गत बर्रा और सुलेसा शाखा में ग्रामीण डाक सेवक के पद पर हो गया था।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान दोनों अंकसूचियों को तमिलनाडु बोर्ड भेजा गया, जहां से पुष्टि हुई कि ये अंकसूचियां फर्जी हैं और संबंधित बोर्ड ने इन्हें कभी जारी नहीं किया था। इसके बाद अधीक्षक डाकघर रायगढ़ की शिकायत पर सिटी कोतवाली थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पूछताछ में दोनों अभ्यर्थियों ने बताया कि उनकी मुलाकात कोरबा निवासी विनोद कुमार राठौर से हुई थी, जिसने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराईं। आरोप है कि आरोपी ने नरेंद्र कुमार से करीब 3.50 लाख रुपये लिए, जबकि सोनम साहू से नौकरी लगने के बाद भुगतान लेने की बात तय हुई थी। फर्जी दस्तावेजों के कारण दोनों की नियुक्ति रद्द कर दी गई।
मुख्य आरोपी विनोद कुमार राठौर घटना के बाद से फरार था और लगातार ठिकाने बदल रहा था। पुलिस को सूचना मिली कि वह कोरबा में छिपा हुआ है। इसके बाद सिटी कोतवाली पुलिस की टीम ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले भी जालसाजी के मामलों में शामिल रहा है। वर्ष 2013 में नकली नोट मामले में उसे 10 वर्ष की सजा हो चुकी है। जेल से बाहर आने के बाद उसने दोबारा सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी का सिलसिला शुरू कर दिया।
पूछताछ में आरोपी ने फर्जी अंकसूचियां उपलब्ध कराने और नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने की बात स्वीकार की। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले गिरोहों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
