‘टाटा ट्रस्ट्स’ में मचा महा-घमासान! वेणु श्रीनिवासन की शिकायत पर टली 16 मई की अहम बैठक, चैरिटी कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश

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मुंबई। टाटा ग्रुप की रीढ़ माने जाने वाले ‘टाटा ट्रस्ट्स’ के भीतर एक बड़ा अंदरूनी विवाद सामने आया है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर अमोघ एस. कलोटी ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए टाटा ट्रस्ट्स को 16 मई को होने वाली अपनी हाई-प्रोफाइल बोर्ड मीटिंग स्थगित करने का आदेश दिया है। इस रोक के पीछे खुद ट्रस्ट के वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन की एक गंभीर शिकायत बताई जा रही है, जिसके बाद अब ट्रस्ट के पूरे गवर्नेंस (कामकाज) की जांच शुरू हो गई है। चैरिटी कमिश्नर ने साफ कर दिया है कि जब तक इंस्पेक्टर इस पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देते, तब तक कोई भी मीटिंग नहीं की जा सकेगी।

इस पूरे विवाद की जड़ सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के बोर्ड की बनावट और महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट (MPTA) का एक नया नियम है। दरअसल, 1 सितंबर 2025 से लागू हुए नए ऑर्डिनेंस के तहत किसी भी ट्रस्ट के बोर्ड में लाइफटाइम ट्रस्टियों की संख्या 25% से अधिक नहीं हो सकती। लेकिन, SRTT के छह ट्रस्टियों में से तीन—नोएल टाटा, जिमी टाटा और जहांगीर एच सी जहांगीर—’लाइफ ट्रस्टी’ हैं, जो कानूनी सीमा से दोगुनी है। इसी कानूनी पेंच को लेकर ट्रस्टी विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन एक तरफ, तथा चेयरमैन नोएल टाटा दूसरी तरफ नजर आ रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि 16 मई की इस स्थगित हुई बैठक के एजेंडे में टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के प्रतिनिधित्व पर दोबारा विचार करना शामिल था। मौजूदा समय में नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ही टाटा संस के बोर्ड में नॉमिनी हैं। इस अंदरूनी खींचतान का असर $180 बिलियन के विशाल टाटा साम्राज्य पर पड़ सकता है, क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की 66% हिस्सेदारी है, जिस पर इस समय पब्लिक लिस्टिंग का भारी दबाव भी है।