प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत के सामने लागू नियमों के अनुसार, जिन महिला कर्मचारियों की दो या उससे अधिक जीवित संतानें हैं, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं दिया जा सकता।
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मामला एक महिला कर्मचारी की चौथी संतान के लिए मांगे गए मातृत्व अवकाश से जुड़ा था। याचिका में दलील दी गई कि, उन्होंने पहले बच्चों के जन्म के समय इस सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया था, इसलिए इस बार छुट्टी मिलनी चाहिए। हालांकि, सरकार ने वित्तीय हस्त पुस्तिका के नियमों का हवाला देते हुए इसका विरोध किया।
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नियम के मुताबिक मातृत्व अवकाश पर बच्चों की संख्या से जुड़ी सीमा लागू है। साथ ही सामान्य तौर पर पिछली मातृत्व छुट्टी की समाप्ति के बाद कम से कम दो साल का अंतर भी निर्धारित है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में अपवाद का प्रावधान मौजूद है। वहीं, गर्भपात या मिसकैरेज की स्थिति में छह सप्ताह तक की छुट्टी का अलग प्रावधान है, जो जीवित बच्चों की संख्या से प्रभावित नहीं होता। इस फैसले ने सरकारी महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश से जुड़े नियमों और उनकी व्यावहारिक व्याख्या को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
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