कोयला लेवी घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: छठे पूरक चालान में वित्तीय सांठगांठ का दावा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 500 करोड़ रुपये से अधिक के कथित कोयला लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने विशेष न्यायालय में करीब 9500 पन्नों का छठा पूरक चालान पेश किया है। इसमें 12 आरोपियों की भूमिका का विस्तृत विवरण दर्ज है। जांच एजेंसी के अनुसार वसूली का अवैध तंत्र तैयार करने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये का लेन-देन किया गया था। इस व्यवस्था को स्थापित करने के लिए पप्पू बंसल ने रकम दी थी, जिसे निखिल चंद्राकर और नवनीत ने प्राप्त कर मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाया। सिंडिकेट के सदस्य आपस में संवाद करने और पैसों से संबंधित निर्देश देने के लिए सात अलग-अलग व्हाट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल करते थे।

जांच में जब्त मोबाइल फोन, व्हाट्सऐप चैट, हस्तलिखित डायरियों और बैंक लेन-देन को प्राथमिक आधार बनाया गया है। कोयला परिवहन से 25 रुपये प्रति टन की अवैध वसूली करने, राशि को अलग-अलग स्तरों पर वितरित करने, राजनीतिक व व्यक्तिगत कार्यों में खर्च करने तथा जमीन, फ्लैट और वाशरी जैसी संपत्तियों में निवेश के तथ्य सामने आए हैं।

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अवैध वसूली का तंत्र और प्रशासनिक आदेश:
जांच के अनुसार वसूली का यह सिस्टम 15 जुलाई, 2020 के प्रशासनिक आदेश के बाद शुरू हुआ। तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म समीर विश्नोई ने यह आदेश जारी किया था, जिसके तहत ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से 25 रुपये प्रति टन की अवैध वसूली की गई। अलग-अलग जिलों से वसूली गई राशि रायपुर पहुंचाई जाती थी, जहां उसका हिसाब रखने के बाद वितरण किया जाता था। आरोपी अनुराग दीवान के जब्त मोबाइल से 15 जुलाई 2020 के आदेश से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगी विभिन्न जिलों में बैठकें करते थे और उनके ठहरने के लिए विश्राम गृहों में मुख्यमंत्री आवास के नाम से कमरे बुक कराए जाते थे। इसके अलावा बालको और अंबुजा कंपनी से संबंधित पत्राचार में भी परिवहन बिलों में 25 रुपये प्रति टन जोड़ने का उल्लेख है। कोयले के साथ लौह अयस्क पैलेट से भी 100 रुपये प्रति टन अवैध वसूली की गई। तत्कालीन संचालक जयप्रकाश मौर्य ने पैलेट उद्योगपतियों की बैठक लेकर उन्हें सूर्यकांत तिवारी या उसके लोगों को 100 रुपये प्रति टन देने के निर्देश दिए थे।

डायरी प्रविष्टियां और संपत्तियों में निवेश:
विशेष न्यायालय में पेश चालान में राम गोपाल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव प्रसाद राय, जयप्रकाश मौर्य, पियूष कुमार साहू, जोगेन्दर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा की भूमिका का उल्लेख है। राम गोपाल अग्रवाल से संबंधित जब्त डायरियों में ‘भवन’ और ‘C PARTY’ नाम से दर्ज 32 प्रविष्टियों में 104.20 करोड़ रुपये दर्ज हैं, जिन्हें संगठन से जुड़े काम तक पहुंचाए जाने का दावा है। लेवी की राशि का उपयोग जमीन, फ्लैट और वाशरी में किया गया। पियूष कुमार साहू ने परिवार से संबंधित संपत्तियों में निवेश कराया, जबकि अनुराग चौरसिया के मामले में फ्लैट व जमीन खरीद के लेन-देन की पुष्टि हुई। जोगेन्दर सिंह से जुड़ी सात फर्मों में लगभग 40 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का ब्योरा मिला है। सुनील कुमार अग्रवाल पर नकदी रखने, आगे भुगतान करने और वाशरी खरीद में निवेश का आरोप है। दीपेश टांक ने जमीन सौदों में रजिस्ट्री मूल्य से अतिरिक्त नकदी लेकर उसे कृषि आय के रूप में दर्शाया। इस मामले में पूर्व में एक मुख्य व पांच पूरक चालान पेश हो चुके हैं तथा धारा 173(8) के तहत शेष जांच जारी है।

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वित्तीय लेन-देन का ब्योरा सामने आया:
जांच में सिंडिकेट और राजनीतिक हस्तियों के बीच वित्तीय लेन-देन का ब्योरा सामने आया है। विधायक देवेंद्र यादव सीधे सूर्यकांत तिवारी के संपर्क में थे और दोनों के बीच खैरागढ़ चुनाव तथा मुलाकात से संबंधित व्हाट्सएप बातचीत दर्ज है। पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय पर सूर्यकांत तिवारी से 46 लाख रुपये लेने का आरोप है। इसमें से 42 लाख रुपये उत्तर प्रदेश चुनाव में खर्च किए गए, जबकि चार लाख रुपये से पत्नी के लिए 60 ग्राम का सोने का हार 4.30 लाख रुपये में खरीदा गया। इसके लिए ज्वेलरी शॉप का चयन कर चालक के माध्यम से राशि का भुगतान किया गया था। इसी तरह नेता विनोद तिवारी ने 19 किश्तों में 1.87 करोड़ रुपये प्राप्त किए, जिसका उपयोग चुनाव और संपत्ति खरीदने में हुआ। नेता आरपी सिंह पर 2.014 करोड़ रुपये लेने का आरोप है। उन्होंने लिखित बयान में स्वीकार किया कि इस राशि का इस्तेमाल गाड़ियों और मीडिया प्रबंधन में किया गया।

जांच का दायरा और अधिकारियों की संलिप्तता:
प्रकरण में ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन कर करीब 570 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली का आरोप है। मामले में दो पूर्व मंत्रियों और विधायकों समेत 36 लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रानू साहू, समीर विश्नोई, तत्कालीन मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया, उप संचालक एसएस नाग और सूर्यकांत तिवारी पूर्व में ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। तीन पुलिस अधीक्षकों पारूल माथुर, प्रशांत अग्रवाल और भोजराम पटेल के नाम भी सामने आए हैं, जो सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी के संपर्क में थे। इन अधिकारियों पर विभागीय सूचनाएं देने का आरोप है। पारूल माथुर पर तिवारी के कहने पर वाहनों पर कार्रवाई करने और आरक्षक अमित कुमार दुबे पर जांच अधिकारियों की जासूसी करने का आरोप है।

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