अंतरराष्ट्रीय साइबर डेटा गिरोह का पर्दाफाश, चार आरोपी गिरफ्तार

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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर डेटा तस्करी गिरोह का खुलासा किया है। यह गिरोह आम भारतीय नागरिकों की निजी और संवेदनशील जानकारी विदेशी अपराधियों को बेचने का काम कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने बिहार और उत्तर प्रदेश के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं।वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि अहियापुर थाना क्षेत्र का निवासी ऋषभ कुमार अवैध तरीके से एपीआई बनाकर डेटा बेचने का कार्य कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर डीएसपी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें बिहार एसटीएफ, जिला आसूचना इकाई और साइबर थाना की तकनीकी टीम को शामिल किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ऋषभ कुमार को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर उसके तीन अन्य सहयोगियों को भी पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपियों में गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) के दीपक चौधरी उर्फ आशु कुमार, दरभंगा के सुधांशु कुमार और मुजफ्फरपुर के हथौड़ी क्षेत्र के साहिल कुमार शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी सिम कार्ड, टेलीग्राम बॉट्स और अवैध रूप से बनाए गए एपीआई का उपयोग कर रहे थे। इन माध्यमों से वे सरकारी और निजी डेटाबेस तक अनधिकृत पहुंच बनाकर लोगों की गोपनीय जानकारी चुरा रहे थे।पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन और आईपैड की जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह मोबाइल नंबर, आईएमईआई नंबर, आधार और पैन कार्ड की जानकारी, वाहनों के पंजीकरण विवरण तथा बैंक खातों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां विदेशी साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा रहा था। आरोपियों के उपकरणों में विदेशी गिरोहों के साथ हुई बातचीत के ठोस प्रमाण भी मिले हैं। जांच के दौरान कई संदिग्ध टेलीग्राम समूह और चैनल संचालित होने की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा, मुख्य आरोपी ऋषभ कुमार से जुड़े बैंक खातों में जमा लगभग चार लाख रुपये की राशि को पुलिस ने फ्रीज कर दिया है। पुलिस ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।