नई दिल्ली। देश में किफायती और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने बड़ा कदम उठाया है। ICMR ने कैंसर और संक्रामक रोगों से जुड़ी तीन स्वदेशी जैव-चिकित्सा तकनीकों को भारतीय कंपनियों को लाइसेंस के जरिए सौंप दिया है। इससे भविष्य में मरीजों के लिए बेहतर और कम लागत वाले उपचार व टीके उपलब्ध होने की उम्मीद है।
इन तकनीकों में सर्वाइकल कैंसर से जुड़े एचपीवी संक्रमण के इलाज के लिए विकसित SHEITA2 एंटी-एचपीवी चिकित्सीय उम्मीदवार शामिल है, जिसे एमक्योर फार्मास्युटिकल्स को दिया गया है। वहीं, टाइफाइड और आंत्र संक्रमणों से बचाव के लिए विकसित दो नई वैक्सीन तकनीकों का हस्तांतरण बायोलॉजिकल ई लिमिटेड को किया गया है।
ICMR के अनुसार, इन तकनीकों का उद्देश्य प्रयोगशाला में हुए शोध को आम लोगों तक पहुंचाना है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और प्रभावी बन सकें। SHEITA2 तकनीक एचपीवी से प्रभावित कोशिकाओं को लक्षित करने वाली नई उपचार पद्धति के रूप में देखी जा रही है। इसके अलावा, नए वैक्सीन उम्मीदवार टाइफाइड, पैराटाइफी और शिगेला जैसे संक्रमणों से सुरक्षा देने में मददगार हो सकते हैं। ICMR ने कहा कि यह कदम आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी स्वास्थ्य नवाचार को मजबूत करेगा और भारत को जैव-चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
