भारत ने UN को चेताया , होर्मुज से लाल सागर तक संकट, दुनिया की खाद्य सुरक्षा पर मंडराया खतरा

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नई दिल्ली । भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से अपील की है कि संघर्षों के कारण पैदा होने वाले मानवीय संकट को कम करना उसकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत ने चेतावनी दी कि ऊर्जा, उर्वरक, समुद्री परिवहन और कृषि व्यापार में रुकावटों का सीधा असर वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा खाद्य आयात पर निर्भर विकासशील देशों को उठाना पड़ रहा है।भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा कि आज के संघर्षों का प्रभाव केवल युद्ध वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूर-दराज के देशों तक भी पहुंचता है। ऊर्जा बाजार, उर्वरक आपूर्ति, समुद्री परिवहन, मानवीय सहायता और कृषि व्यापार में बाधाएं क्षेत्रीय संघर्षों को वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए खतरे में बदल सकती हैं।

‘फूड अंडर फायर: ग्लोबल और लोकल फूड संकट को कम करने में सुरक्षा परिषद की भूमिका’ विषय पर हुई बहस में हरीश ने कहा कि विकासशील देशों, खासकर खाद्य आयात पर अत्यधिक निर्भर देशों को इन व्यवधानों का सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद को संघर्षों से होने वाले मानवीय संकट को कम करने पर प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके लिए मानवीय सहायता की सुरक्षित, तेज और निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।पी. हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके कदम, जैसे प्रतिबंध, अनजाने में मानवीय सहायता या वैध खाद्य एवं कृषि व्यापार में बाधा न बनें। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य-सुरक्षित और मजबूत समाज का निर्माण मुख्य रूप से राष्ट्रीय सरकारों की जिम्मेदारी है। संयुक्त राष्ट्र का विकास तंत्र और रोम स्थित संबंधित एजेंसियां इस दिशा में सहायता करती हैं, जबकि सुरक्षा परिषद की भूमिका अलग है।

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हरीश ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भारत के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के साथ-साथ दुनिया की खाद्य सुरक्षा में भी योगदान दे रहा है।उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लोगों को सब्सिडी वाले अनाज का कानूनी अधिकार मिलता है। वहीं, PM-KISAN योजना के माध्यम से 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।उन्होंने 2023 में भारत की पहल पर मनाए गए ‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ का भी जिक्र किया। हरीश ने कहा कि इससे जलवायु-अनुकूल और पोषक तत्वों से भरपूर फसलों की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित हुआ। उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों को भी टिकाऊ खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।हरीश ने वाणिज्यिक जहाजरानी और प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावटों से खाद्य सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे को भी रेखांकित किया। हालांकि, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य, काला सागर और लाल सागर से जुड़े संघर्षों का सीधे नाम नहीं लिया।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले इन क्षेत्रों की परिस्थितियों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध के कारण काला सागर के जरिए होने वाले अनाज और ऊर्जा निर्यात पर असर पड़ा है। इन निर्यातों में यूक्रेन और रूस दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।गुटेरेस ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की करीब पांचवीं हिस्से की तेल आपूर्ति और लगभग एक-तिहाई उर्वरक व्यापार गुजरता है। इस मार्ग पर प्रतिबंधों और आवाजाही में रुकावट से कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और उपलब्धता कम हुई है।उन्होंने कहा कि लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों ने भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी खतरा बढ़ा दिया है।

गुटेरेस ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए उर्वरक और अनाज की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के व्यावहारिक तरीके सुझाए हैं। उन्होंने कहा कि भरोसा बढ़ाने की इस समयबद्ध पहल में शुरुआत में उर्वरक और उससे जुड़े कच्चे माल पर ध्यान दिया जाएगा। बाद में इसे अन्य उत्पादों तक भी विस्तार दिया जा सकता है।मार्च में दिए गए मूल प्रस्तावों को आगे बढ़ाते हुए गुटेरेस ने सोमवार को बताया कि ऑफिस फॉर प्रोजेक्ट सर्विसेज (UNOPS) की अगुवाई वाली टास्क फोर्स ने उर्वरक और संबंधित उत्पादों को ले जाने वाले जहाजों के रजिस्ट्रेशन और सत्यापन के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसका उद्देश्य इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को आसान बनाना है।गुटेरेस ने कहा कि अब इस व्यवस्था को लागू करने के लिए संबंधित पक्षों के सहयोग और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। उन्होंने सभी पक्षों से गंभीरता और रचनात्मक तरीके से इस पहल में शामिल होने की अपील की।