IG राम गोपाल गर्ग ने ‘सशक्त’ ऐप की समीक्षा बैठक ली

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रायगढ़। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राम गोपाल गर्ग ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘सशक्त’ (Sashakt) ऐप की रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर चोरी के वाहनों की रिकवरी, डेटा प्रबंधन और तकनीक आधारित पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। बैठक में रेंज के सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी, थाना प्रभारी तथा हाल ही में पदस्थ प्रशिक्षु उप निरीक्षक (पीएसआई) शामिल हुए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य बिलासपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले जिलों में दोपहिया और चारपहिया वाहनों की चोरी पर प्रभावी नियंत्रण, संदिग्ध वाहनों की त्वरित पहचान तथा चोरी के मामलों में रिकवरी दर को बढ़ाना था। आईजी ने कहा कि आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग से पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, तेज और परिणाममूलक बनाया जा सकता है। समीक्षा के दौरान आईजी राम गोपाल गर्ग ने निर्देश दिए कि रेंज के सभी जिलों में दर्ज वाहन चोरी के मामलों में जहां इंजन नंबर या चेसिस नंबर दर्ज नहीं हैं, वहां एक सप्ताह के भीतर लंबित डेटा और बैकलॉग को पूरा किया जाए। साथ ही संबंधित नोडल अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर वाहन पोर्टल के माध्यम से आवश्यक जानकारी अपडेट करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि अब से किसी भी थाना क्षेत्र में वाहन चोरी की एफआईआर दर्ज होते ही वाहन का पूरा विवरण तत्काल ‘सशक्त’ ऐप पर अपलोड किया जाए। प्रत्येक एफआईआर में इंजन नंबर और चेसिस नंबर का उल्लेख अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि चोरी के वाहनों की पहचान और ट्रैकिंग में किसी प्रकार की कठिनाई न आए। बैठक में सार्वजनिक स्थानों पर वाहन जांच अभियान को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, सराफा क्षेत्र तथा अन्य सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर ‘सशक्त’ ऐप के माध्यम से नियमित जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा पार्किंग ठेकेदारों और कर्मचारियों को भी ऐप से जोड़कर वाहन सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की योजना पर बल दिया गया।

आईजी ने हाल ही में पदस्थ नए अधिकारियों और कर्मचारियों का शत-प्रतिशत पंजीयन ऐप पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक नए यूजर को प्रतिदिन कम से कम 20 संदिग्ध वाहनों की जांच करने का लक्ष्य दिया, जिससे उन्हें ऐप के उपयोग का व्यावहारिक अनुभव मिल सके। साथ ही बरामद वाहनों की जानकारी तत्काल बैक-एंड सिस्टम में अपडेट करने के निर्देश दिए गए, ताकि वाहन स्वामियों को सुपुर्दगी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और रिकॉर्ड में दोहराव की स्थिति न बने।

बैठक के दौरान मुंगेली के पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने साइबर अपराध पीड़ितों की राशि वापस दिलाने के लिए अपनाए जा रहे मनी रिकवरी मैकेनिज्म (MRM) पर विस्तृत लाइव प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि साइबर हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर पोर्टल के समन्वय से शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराया जाता है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर होल्ड की गई राशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराई जाती है।

एसपी भोजराम पटेल ने साइबर अपराध के मामलों में ‘गोल्डन आवर’ की महत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि ठगी होने के बाद पहले एक से दो घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है। समय पर सूचना मिलने से बैंक खातों को तुरंत होल्ड किया जा सकता है और पीड़ित की राशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। बैठक के अंत में आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि ‘सशक्त’ ऐप चोरी के वाहनों की बरामदगी और अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस का एक अत्याधुनिक और प्रभावी तकनीकी माध्यम है।

उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐप का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करें, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करें और तकनीक आधारित पुलिसिंग को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से न केवल वाहन चोरी के मामलों में तेजी से सफलता मिलेगी, बल्कि जनता का पुलिस व्यवस्था पर विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।