हिन्दू , हिन्दुत्व एवं हिन्दुस्तान – डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘

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राजनैतिक और वैचारिक जगत में हिन्दू, हिन्दुत्व एवं हिंन्दुस्तान शब्द को लेकर अक्सर बहस होती है। कुछ लोग इस संदर्भ में जानकारी के अभाव में तो कुछ राजनीतिक स्वार्थ के लिए अनाप – सनाप बयान देकर देश में कभी कभी विवाद एवं अराजकता की स्थिति पैदा कर देते है। हिन्दू शब्द के संदर्भ में समय – समय पर सामाजिक एवं राजनीतिक दलों के बयान सामने आते रहे हैं। यथा-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के अनुसार हिंदू शब्द भौगोलिक पहचान से जुड़ा है , सिंधु नदी के पार रहने वालों की पहचान है। हिंदू का अर्थ भारतीय होता है। यह शब्द एक संप्रदाय से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह देश की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा है। उन्होंने हिंदू शब्द को विशेषण माना है। जो सभी धर्मों का सम्मान करता है, वही सच्चा हिंदू है।भाजपा के विभिन्न नेताओं का भी मानना है कि हिन्दू धर्म और हिन्दुत्व को अलग नहीं किया जा सकता। हिन्दुत्व, हिन्दू धर्म का मूल सार है, सभ्यतागत चेतना है और हिन्दू होने पर गौरव करना ही हिन्दुत्व है।वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राहुल गांधी ने हिन्दू धर्म और हिन्दुत्व दोनों अलग -अलग बताते हुए कहा है कि हिन्दू धर्म समावेशी और अहिंसक है, जबकि हिन्दुत्व इसका एक राजनीतिक रूपांतरण है। उन्होंने हिन्दुत्व की तुलना नफऱत फैलाने वाली विचारधारा से की है। जहाँ तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने हिन्दुत्व को हानिकारक बताया और कहा कि हिन्दू धर्म को, इससे बचाने की जरूरत है। वहीं कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर ने हिन्दुत्व को उन्माद और विभाजनकारी बताया है। नवंबर 2022 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतीश जर्कीहोली ने कहा था कि हिंन्दू शब्द का अर्थ अत्यंत गंदा व शर्मनाक होता है, जिस पर व्यापक बहस होनी चाहिए। हालांकि बाद में वे अपने बयान से यह कहकर मुकर गये थे कि उनके बयान को विकृत रूप में दर्शाया गया। इन तमाम बयानों से स्पष्ट होता है कि सत्तादल हिन्दू एवं हिन्दुत्व को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीयता और अखंडता के प्रतीक के रूप में देखता है तो विपक्षी दल के लोग हिन्दुत्व शब्द को राजनीतिक विचारधारा मानते हैं। यदि पौराणिक गाथाओं पर दृष्टि डालें तो ऋग्वेद धार्मिक ग्रंथ में सप्त सिन्धु का उल्लेख मिलता है। वह भूमि जहां आर्य रहते थे।
हिन्द-आर्य भाषाओं की स ध्वनि ईरानी भाषाओं की ह ध्वनि में बदल जाती है इसलिए सप्त सिन्धु शब्द पारसियों की अवेस्तन भाषा में हिन्दू में परिवर्तित हो गया इस प्रकार ईरानियों ने सिन्धु नदी के पूर्व में रहने वालों को हिन्दू नाम दिया। एक अन्य मतानुसार चीनी यात्री ह्वेनसांग के समय में भी ‘हिन्दू’ शब्द प्रचलित था। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा को बहुत महत्व दिया जाता है।इसलिए हिन्दू और इंडिया शब्द की उत्पत्ति चन्द्रमा के पर्यायवाची शब्द इन्दु से हुई है।प्रसिद्ध शोधकर्ता नरेन्द्र पिपलानी का मानना है कि हिन्द शब्द की उत्पत्ति वेदों में वर्णित इन्द्र के अपभ्रंश रूप से हुई है।उनके अनुसार आर्यों द्वारा दिया गया नाम इन्दका रोमन में इन्देय एवं अंग्रेजी भाषा में इंडिया बन गया। एक अन्य विचारानुसार हिमाचल के प्रथम अक्षर हि और इन्दु के अंतिम अक्षर न्दु से हिन्दू शब्द की उत्पत्ति हुई है और इससे संबंधित भूभाग को हिन्दुस्तान कहा जाता है। यह बात देवगुरु बृहस्पति द्वारा रचित प्राचीन हिंदू ग्रंथ बृहस्पति आगम के श्लोक से भी प्रमाणित होती है -हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥ अर्थात हिमालय से प्रारंभ होकर इन्दु सरोवर यानी हिन्द महासागर तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है। बृहस्पति आगम के एक और श्लोक में हिन्दू शब्द को परिभाषित करते हुए लिखा गया है कि- ?कार मूलमंत्राढ्य: पुनर्जन्म दृढ़ाशय: गोभक्तो भारतगुरु: हिन्दुर्हिंसनदूषक:।हिंसया दूयते चित्तं तेन हिन्दुरितीरित:। अर्थात ‘?कार’ जिसका मूल मंत्र है, पुनर्जन्म में जिसकी दृढ़ आस्था है, भारत ने जिसका प्रवर्तन किया है तथा हिंसा की जो निंदा करता है, वह हिन्दू है। कुछ इतिहासकार हिन्दू शब्द को हिन्दुकुश पर्वत जिसे पहले पारिजात पर्वत भी कहा जाता था से भी जोड़कर देखते हैं।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25(2)(ख) के तहत हिंन्दू शब्द को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि हिंदुओं से तात्पर्य सिख, जैन या बौद्ध धर्म का पालन करने वाले व्यक्तियों से है, और हिंदू धार्मिक संस्थानों का अर्थ भी इसी प्रकार समझा जाएगा और हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 ,हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 , हिन्दू अल्पसंख्यक एवं संरक्षकता अधिनियम, 1956 और हिंदू उत्तराधिकार संशोधित अधिनियम 2005 जैसे विभिन्न संहिताबद्ध हिंदू कानूनों में भी यही परिभाषित है।हिन्दुत्व शब्द का प्रयोग 1923 में वी.डी. सावरकर ने किया था। उन्होंने इसका पहली बार प्रयोग हिन्दू धर्म पर लिखे एक लेख में किया था। जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति को हिन्दू मूल्यों के आधार पर परिभाषित करना और संपूर्ण हिन्दू समाज को एक राज्य में एकजुट करना है। हिन्दू वह व्यक्ति कहलाता है जो भारत को अपनी मातृभूमि, पितृभूमि और पवित्र भूमि मानता है। अपनी महत्वपूर्ण पुस्तक, ‘ एसेंशियल्स ऑफ हिंदुत्व ‘ में सावरकर लिखते हैं कि हिन्दू धर्म हिन्दुत्व का एक अंश है। हिन्दुत्व उस साझा पहचान और एकता की भावना को दर्शाता है जो मूल रूप से उस भूमि से संबंधित लोगों में पाई जाती है जो अब भारत है। दरअसल हिन्दू धर्म, जिसे सनातन धर्म भी कहा जाता है, विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है, यह सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक काल से विकसित दर्शन, परंपराओं और प्रथाओं का एक संग्रह है। हिन्दुस्तान’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले फारसी इतिहासकार मिन्हाज ए सिराज द्वारा तेरहवीं शताब्दी में पंजाब, हरियाणा और गंगा-यमुना के बीच के क्षेत्रों के लिए किया था। संक्षेप में कहा जाए तो हिन्दू सनातन धर्म पर आधारित अर्थात वेदों, पुराणों, और भारतीय संस्कृति में आस्था रखते वाले लोगों की एक धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान एवं जीवन जीने की पद्धति है तथा हिन्दुत्व एक सामाजिक विचारधारा है जो हिंदू संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मानती है और हिन्दुस्तान भौगोलिक रूप से हिन्दू बाहुल्य भारत राष्ट्र है जिसे हिंदू अपनी मातृभूमि, पितृभूमि और पुण्यभूमि मानते हैं।

डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’