कैंसर से बचाव के लिए जरूरी हैं सही आदतें और समय पर जांच, डॉक्टर ने बताए रोकथाम के प्रभावी तरीके

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रायपुर। कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय रहते सावधानी, सही जीवनशैली, टीकाकरण और नियमित जांच से इसके खतरे को कम करने के साथ कई मामलों में शुरुआती अवस्था में पहचान संभव है। अक्सर मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है, जब लक्षण काफी बढ़ चुके होते हैं। ऐसे में इलाज भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. भरत भूषण खुर्से ने कैंसर से बचाव और समय पर पहचान को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं।

डॉ. खुर्से के अनुसार, कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि बेहद जरूरी है। इसके लिए जिम जाना अनिवार्य नहीं है। रोजाना 30 मिनट तेज पैदल चलना, साइकिल चलाना, बैडमिंटन खेलना और अन्य शारीरिक गतिविधियां भी फायदेमंद हो सकती हैं। खानपान पर ध्यान देना भी जरूरी है। मांस को तेज आंच पर जलने तक भूनने से बचना चाहिए। इसकी जगह भाप में पकाने, बेक करने या मध्यम आंच पर ग्रिल करने जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं।

डॉक्टर ने कैंसर से बचाव में टीकाकरण की भूमिका पर भी जोर दिया। एचपीवी (HPV) वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर सहित कुछ अन्य कैंसरों के जोखिम को कम करने में मदद करती है। वहीं, हेपेटाइटिस-बी का टीका लिवर को प्रभावित करने वाले संक्रमण से बचाव करता है, जो आगे चलकर लिवर कैंसर का कारण बन सकता है। इन टीकों को सही उम्र और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार लगवाना महत्वपूर्ण है।

परिवार में कैंसर का इतिहास होने पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि मां, बहन या मौसी-बुआ को स्तन या अंडाशय का कैंसर हुआ है, तो इसकी जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए। कुछ परिवारों में BRCA जीन में बदलाव के कारण कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह पर जेनेटिक टेस्ट और नियमित निगरानी कराई जा सकती है।

कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग भी महत्वपूर्ण है। महिलाओं को स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राफी, जबकि कोलोरेक्टल कैंसर के लिए निर्धारित उम्र में कोलोनोस्कोपी और मल में छिपे खून की जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। तंबाकू, गुटखा और पान का सेवन करने वालों को मुंह की नियमित जांच करानी चाहिए। वहीं, पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर की जांच के संभावित लाभ और जोखिमों पर डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए।

डॉ. भरत भूषण खुर्से का कहना है कि कैंसर की जांच को लेकर डर या लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। बीमारी की समय पर पहचान होने से इलाज के विकल्प बढ़ सकते हैं और बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, परिवार के टीकाकरण पर ध्यान देने और कैंसर के पारिवारिक इतिहास की जानकारी डॉक्टर के साथ साझा करने की अपील की।