कोरिया। जिले के शासकीय प्राथमिक शाला रजवारीपारा में निरीक्षण के दौरान प्रधानपाठक के कथित तौर पर शराब के नशे में पाए जाने के मामले में शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रधानपाठक राम कुमार राजवाड़े को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने और प्रधानपाठक के नशे की स्थिति में होने की बात निरीक्षण प्रतिवेदन में दर्ज की गई थी। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निलंबन आदेश जारी किया।
जानकारी के मुताबिक, 6 अगस्त 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी बैकुंठपुर, संकुल प्राचार्य और शैक्षिक समन्वयक की टीम ने शासकीय प्राथमिक शाला रजवारीपारा का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की व्यवस्थाओं और परिसर से संबंधित कई अनियमितताएं सामने आने का उल्लेख विभागीय आदेश में किया गया है। इसी निरीक्षण के दौरान प्रधानपाठक राम कुमार राजवाड़े की स्थिति को लेकर भी अधिकारियों ने गंभीर टिप्पणी दर्ज की।
निरीक्षण टीम के अनुसार, प्रधानपाठक से बातचीत के दौरान उनके मुंह से शराब की तेज गंध आने की बात सामने आई। साथ ही उनकी बोली भी अस्पष्ट बताई गई। निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि प्रधानपाठक स्कूल समय के दौरान कथित तौर पर नशे की स्थिति में पाए गए। शिक्षा विभाग ने इसे शिक्षक की गरिमा और उनके पदीय दायित्वों के विपरीत आचरण माना है। स्कूल में प्रधानपाठक का पद महत्वपूर्ण होता है। विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन, शिक्षकों के समन्वय, विद्यार्थियों की उपस्थिति और स्कूल की व्यवस्थाओं की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां प्रधानपाठक के ऊपर होती हैं। ऐसे में ड्यूटी के दौरान नशे की स्थिति में पाए जाने के आरोप को विभाग ने गंभीरता से लिया।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि मामले में सामने आए तथ्य प्रथम दृष्टया गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आते हैं। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत माना है। इसी आधार पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत कार्रवाई की गई। आदेश के अनुसार, प्रधानपाठक राम कुमार राजवाड़े को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बैकुंठपुर निर्धारित किया गया है। विभागीय आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद स्कूलों में ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों के आचरण को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। विभाग लगातार यह सुनिश्चित करने पर जोर देता रहा है कि विद्यालयों में शिक्षक और प्रधानपाठक निर्धारित समय पर उपस्थित रहें और विद्यार्थियों के प्रति अपने दायित्वों का जिम्मेदारी से निर्वहन करें। विद्यालय बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिए वहां अनुशासन और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जाती है। इस मामले में निरीक्षण टीम की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। निलंबन आदेश में निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों को आधार बनाया गया है।
विभागीय प्रक्रिया के तहत आगे मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। स्थानीय स्तर पर भी शिक्षा विभाग की कार्रवाई को लेकर चर्चा है। स्कूल में निरीक्षण के दौरान प्रधानपाठक की कथित स्थिति सामने आने के बाद विभाग ने बिना देरी किए कार्रवाई की। इससे यह संदेश भी गया है कि शासकीय संस्थानों में ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता या गंभीर कदाचरण के मामलों को विभाग गंभीरता से लेगा। फिलहाल राम कुमार राजवाड़े निलंबित हैं और उनका मुख्यालय बैकुंठपुर बीईओ कार्यालय निर्धारित किया गया है। निलंबन के दौरान उन्हें विभागीय नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित विभागीय प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
