मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद एक माह से अधिक समय बीतने पर भी प्रभावित परिवारों को नहीं मिला एक रुपया
सरकार गरीबों के साथ कर रही है भद्दा मजाक
गरियाबंद। पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू ने कहा कि महानदी में आई भीषण बाढ़ तथा गंगरेल बांध से अचानक बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने के कारण अभनपुर विधानसभा क्षेत्र के गोबरा नवापारा शहर सहित आसपास के लगभग 15-16 गांवों में भारी तबाही हुई थी। अकेले गोबरा नवापारा शहर में लगभग डेढ़ से दो हजार घर बाढ़ के पानी में डूब गए थे। वहीं आसपास के गांवों में भी सैकड़ों किसानों की धान की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई थीं।
उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी अचानक रात लगभग दो बजे तेजी से बढ़ा, जिसके कारण लोगों को अपने घरों में रखा सामान निकालने तक का अवसर नहीं मिला। घरों में रखा राशन, कपड़े, बर्तन, फर्नीचर, टीवी, फ्रिज, कूलर सहित तमाम इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं अन्य कीमती घरेलू सामान पानी में डूबकर नष्ट हो गए। अनेक परिवारों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। कई परिवारों के सामने रोजमर्रा के जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।
धनेन्द्र साहू ने कहा कि इस गंभीर समस्या को लेकर बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ धरना-प्रदर्शन भी किया गया था। उस दौरान अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने स्वयं उपस्थित होकर आश्वासन दिया था कि दो-तीन दिनों के भीतर प्रभावित परिवारों को सहायता राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन लगभग एक माह बीतने को है, इसके बावजूद आज तक किसी भी प्रभावित परिवार को सहायता राशि प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि जब इस संबंध में एसडीएम से चर्चा की जाती है तो उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों के भुगतान का पूरा प्रकरण तैयार कर शासन को भेज दिया गया है, लेकिन शासन से राशि प्राप्त नहीं हो रही है। आखिर गरीब और आपदा पीडि़त परिवार शासन और प्रशासन के बीच कब तक अपनी सहायता राशि का इंतजार करते रहेंगे?
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धनेन्द्र साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बाढ़ प्रभावित परिवारों को ?10,000 प्रति परिवार सहायता राशि देने की घोषणा की गई थी। प्रभावित परिवारों को उम्मीद थी कि दशहरा त्योहार के पहले उन्हें यह सहायता राशि मिल जाएगी, लेकिन दशहरा बीत गया और किसी को सहायता राशि नहीं मिली। अब दीपावली का त्योहार सामने है और हजारों प्रभावित परिवार इस चिंता में हैं कि जब घर-गृहस्थी का पूरा सामान बाढ़ में नष्ट हो चुका है, तो वे दीपावली कैसे मनाएंगे।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि दीपावली के पहले बिना किसी और विलंब के सभी पात्र बाढ़ प्रभावित परिवारों को घोषित ?10,000 प्रति परिवार की सहायता राशि तत्काल प्रदान की जाए। साथ ही बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसलों का उचित सर्वेक्षण कराकर उन्हें नियमानुसार पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
धनेन्द्र साहू ने कहा कि सरकार की घोषणाएं केवल भाषणों और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जब मुख्यमंत्री स्वयं सहायता राशि देने की घोषणा कर चुके हैं, तो फिर एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गरीब प्रभावित परिवारों को सहायता क्यों नहीं मिली? यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अन्यायपूर्ण स्थिति है।
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उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दीपावली के पहले बाढ़ प्रभावित परिवारों को सहायता राशि का भुगतान नहीं किया गया तो सरकार के इस रवैये का पुरजोर विरोध किया जाएगा। आपदा से पीडि़त हजारों परिवारों के साथ इस प्रकार का व्यवहार गरीबों के साथ भद्दा मजाक और उनके साथ अन्याय है। बाढ़ पीडि़त परिवारों को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
