रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। सोमवार को लोक भवन में राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ी भाषाविदों से मुलाकात कर भाषा के संरक्षण, संवर्धन और संवैधानिक मान्यता पर चर्चा की। बैठक में भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा और प्रमुख संपर्क भाषा है, जिसे करीब 1.5 करोड़ लोग बोलते हैं। उन्होंने इसके समृद्ध साहित्य, व्याकरण और शब्दकोश की ऐतिहासिक विरासत से भी राज्यपाल को अवगत कराया।
डबरियों में आईएमसी और झींगा मछली पालन से ग्रामीण परिवारों को मिल रही अतिरिक्त आय
राज्यपाल ने इस दिशा में विशेष समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति छत्तीसगढ़ी के इतिहास, साहित्य, व्याकरण और अन्य प्रमाणिक दस्तावेजों का व्यवस्थित संकलन करेगी तथा विशेषज्ञों के सुझाव भी जुटाएगी। भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी का व्याकरण 1890 में और पहला शब्दकोश 1939 में तैयार हुआ था। वर्तमान में विश्वविद्यालयों में स्नातक-परास्नातक स्तर पर छत्तीसगढ़ी पढ़ाई जा रही है और नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में भी इसे शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।
