गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। मरवाही जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक शुचिता के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। सूचना के अधिकार (RTI) से निकले दस्तावेजों ने खुलासा किया है कि, शासन के सख्त आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए ‘सर्व शिक्षा अभियान समग्र’ के खाते से लाखों रुपयों का अवैध ट्रांजेक्शन किया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि, राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि, इस मद की अप्रयुक्त राशि को तत्काल वापस (सरेंडर) किया जाए, लेकिन मरवाही जनपद में इस राशि को वापस करने के बजाय बेखौफ होकर निजी हितों के लिए खपाया गया। नियमों के मुताबिक, इस खाते का संचालन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और विकासखंड समन्वयक (BRCC) के संयुक्त हस्ताक्षर से होना अनिवार्य है, मगर यहाँ तमाम कायदे-कानूनों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से पैसों की बंदरबांट की गई।

बैंक स्टेटमेंट की कड़वी सच्चाई यह बयां करती है कि, भारतीय स्टेट बैंक की मरवाही शाखा के खाता क्रमांक 11556672537 से जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच लगभग 99 लाख रुपये और फिर जून 2025 तक करीब 12 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि, शिक्षा के लिए आवंटित इस सरकारी धन का उपयोग स्कूलों के बजाय पेट्रोल पंपों, टूर एंड ट्रेवल्स और कुछ व्यक्तिगत बैंक खातों में भुगतान के लिए किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने भी स्पष्ट कहा कि, यह खाता कभी एकल संचालित नहीं हो सकता, ऐसे में बिना BRCC की सहमति के हुआ यह ट्रांजेक्शन एक बड़े संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।
इस पूरे घोटाले में तत्कालीन और वर्तमान CEO की भूमिका अब सीधे तौर पर जांच के घेरे में है। जिला पंचायत CEO मुकेश रावटे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी से विस्तृत प्रतिवेदन तलब किया है। सवाल यह उठता है कि, जब शासन ने राशि सरेंडर करने का अल्टीमेटम दे दिया था, तब किस अधिकार से सरकारी खजाने को निजी ऐशो-आराम और बाहरी भुगतानों के लिए इस्तेमाल किया गया? फिलहाल, दस्तावेजों में कैद ये आंकड़े और संदिग्ध ट्रांजेक्शन मरवाही जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर गहरा दाग लगा रहे हैं, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
