असम/गुवाहाटी। असम में नागरिकता से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 15 अलग-अलग दस्तावेज पेश करने के बावजूद एक व्यक्ति अपनी भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर सका। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखते हुए उसे विदेशी घोषित कर दिया है।
यह मामला असम के एक दिहाड़ी मजदूर से जुड़ा है, जो पिछले लगभग 60 वर्षों से राज्य में रह रहा था। उसने अपने पक्ष में 1951 एनआरसी की कॉपी, पुराने वोटर कार्ड, जमीन के दस्तावेज, पैन कार्ड, स्कूल सर्टिफिकेट और अन्य पहचान पत्र सहित कई सबूत अदालत में पेश किए थे। इसके बावजूद कोर्ट ने इन्हें पर्याप्त प्रमाण नहीं माना। मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने कहा कि, विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 9 के तहत नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता पर होती है और वह इसे साबित करने में असफल रहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पैन कार्ड, वोटर आईडी या अन्य दस्तावेज नागरिकता के निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकते।
अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के पिता की गवाही को भी स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि नागरिकता जैसे मामलों में केवल मौखिक बयान पर्याप्त नहीं होते। दस्तावेजों में नामों की स्पेलिंग और जन्मतिथि में अंतर को भी अदालत ने गंभीर माना। हालांकि याचिकाकर्ता का दावा था कि, वह 1988 में असम में जन्मा और हमेशा वहीं रहा, लेकिन दस्तावेजों में कई विसंगतियों के चलते अदालत ने उसे विदेशी घोषित कर दिया। यह मामला एक बार फिर असम में नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया की जटिलता को उजागर करता है।
