मंडहोल में अवामी एक्शन कमेटी का धरना, सरदार अमान खान ने पाकिस्तान सरकार पर लगाए भेदभाव के आरोप
मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच नियंत्रण रेखा (एलओसी) को लेकर भी मांग तेज हो गई है। शनिवार, 26 सितंबर को एलओसी से करीब सात किलोमीटर दूर मंडहोल गांव में अवामी एक्शन कमेटी की ओर से एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार, धरने में करीब 25 हजार लोग शामिल हुए। हालांकि, भीड़ की इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।
धरने को संबोधित करते हुए अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेताओं में शामिल सरदार अमान खान ने पीओके में कथित राशन संकट, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य स्थानीय समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि क्या पीओके और जम्मू-कश्मीर के बीच मौजूद नियंत्रण रेखा को समाप्त कर आवागमन के रास्ते खोले जाने चाहिए। आयोजकों के मुताबिक, लोगों ने इन मांगों का समर्थन किया। अमान खान ने कहा कि नियंत्रण रेखा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच वर्षों से सामाजिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। उन्होंने सभा में पुंछ और मेंढर के रास्ते खोलने तथा नियंत्रण रेखा के निकट प्रदर्शन करने के बारे में भी लोगों की राय मांगी। उनके अनुसार, सभा में मौजूद लोगों ने इन मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।
पीओके में जारी आंदोलन में नियंत्रण रेखा के आसपास आवाजाही और व्यापार के रास्ते खोलने की मांग पहले भी सामने आती रही है। इस आंदोलन का एक प्रमुख हिस्सा बिजली, आवश्यक वस्तुओं, रोजगार, शासन और सामाजिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर है। अमान खान ने पाकिस्तान सरकार और प्रशासन पर पीओके के लोगों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान को पीओके के साथ किसी तरह का समझौता करना है तो उसे क्षेत्र के लोगों के साथ पड़ोसी की तरह व्यवहार करना चाहिए।
उन्होंने पाकिस्तान की सेना पर भी गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि दशकों से क्षेत्र के लोगों की जमीन और संसाधनों पर नियंत्रण रखा गया है। उनका कहना था कि स्थानीय लोगों को अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार या सेना की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
धरने के दौरान पीओके में पिछले कुछ महीनों से कथित राशन संकट का मुद्दा भी उठाया गया। अमान खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से आवश्यक खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित की गई है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले पीओके के लोग जम्मू-कश्मीर के मेंढर क्षेत्र से जरूरी सामान खरीदकर लाते थे, लेकिन नियंत्रण रेखा पर बाड़ और आवाजाही पर लगी पाबंदियों के कारण यह रास्ता बंद हो गया। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र की मौजूदा समस्याओं की जड़ पाकिस्तान का नियंत्रण है और लोगों को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
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पीओके में खाद्य सामग्री, बिजली की कीमतों और अन्य आवश्यक सेवाओं को लेकर विरोध पहले भी व्यापक आंदोलन का हिस्सा रहा है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने पिछले वर्षों में सब्सिडी, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और शासन में सुधार समेत कई मांगें उठाई हैं। सभा में पीओके की विधानसभा के चुनाव का मुद्दा भी उठाया गया। अमान खान ने दावा किया कि कुल 45 विधानसभा सीटों में से पुंछ और सुधनौती जिलों की सात सीटों पर विरोध के कारण मतदान नहीं हो सका, जबकि शेष 38 सीटों पर चुनाव कराया गया।
उन्होंने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन सात सीटों पर मतदान नहीं हुआ, वहां स्थानीय लोगों की इच्छा के विरुद्ध चुनाव कराना संभव नहीं होगा। हालांकि, मतदान से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं हो सकी है। अमान खान ने मुजफ्फराबाद स्थित पीओके की स्थानीय सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय सरकार पाकिस्तान की सेना के दबाव में काम करती है और लोगों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम नहीं है।
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उन्होंने हालिया विरोध-प्रदर्शनों में हुई हिंसा और लोगों की मौत का उल्लेख करते हुए सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। पीओके में इस वर्ष हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों में लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं, हालांकि मृतकों की संख्या और घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं। धरने के अंत में अमान खान ने पीओके के भविष्य को लेकर पाकिस्तान से अलग होने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की कई पीढिय़ां लंबे समय से पाकिस्तान के नियंत्रण में रह रही हैं और वास्तविक विकास तथा खुशहाली के लिए व्यवस्था में बड़े बदलाव की आवश्यकता है।
पीओके में जारी आंदोलन की शुरुआत मुख्य रूप से महंगाई, बिजली दरों, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, बेरोजगारी और शासन से जुड़े मुद्दों से हुई थी, लेकिन समय के साथ इसके कुछ नेताओं ने राजनीतिक अधिकारों और पाकिस्तान के नियंत्रण पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। अमान खान ने कहा कि क्षेत्र में लोगों के अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर विरोध आगे भी जारी रहेगा। हालिया धरने में नियंत्रण रेखा समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर के पुंछ तथा मेंढर से रास्ते खोलने की मांग का उठना इस आंदोलन के बदलते स्वरूप की ओर संकेत करता है।

