तिरंगा यात्रा को लेकर दीपक बैज का BJP पर हमला, बोले- ‘अपने कर्मों का पाप धोने निकाल रहे यात्रा’

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रायपुर। भाजपा की तिरंगा यात्रा को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत गरमा गई है। PCC चीफ दीपक बैज ने भाजपा और RSS पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जिन लोगों ने कभी तिरंगे को स्वीकार नहीं किया, वे आज तिरंगा यात्रा निकालकर देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं। बैज ने कहा कि जो लोग तिरंगे के तीनों रंगों को अशुभ मानते थे, जिन्होंने आजादी के बाद तिरंगा नहीं फहराया और अंग्रेजों का साथ दिया, वे आज देशभक्ति की बात कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं को अपना इतिहास याद करने की नसीहत देते हुए कहा कि भाजपा और RSS ने कभी तिरंगे को स्वीकार नहीं किया था। बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपाई अपने कर्मों का पाप धोने के लिए तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं। वहीं, विश्व आदिवासी दिवस पर भाजपा नेताओं की ओर से बधाई संदेश नहीं आने को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। बैज ने कहा कि आदिवासी दिवस पर सभी लोगों ने मिलकर कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, लेकिन छत्तीसगढ़ के भाजपा के आदिवासी नेताओं, चुने हुए मंत्रियों, देश की राष्ट्रपति और प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री की ओर से बधाई संदेश नहीं आया। उन्होंने कहा कि 2023 से पहले यही नेता आदिवासी दिवस पर बधाई देते थे, लेकिन सरकार बनने के बाद अब बधाई संदेश नहीं दे रहे हैं। बैज ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा सरकार आदिवासी एकता और अखंडता को तोड़ना चाहती है, इसलिए आदिवासी दिवस पर बधाई नहीं दी जा रही है। उन्होंने भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वे आदिवासी नहीं हैं, फिर भी उन्होंने बधाई दी, जो भाईचारे और एकता की मिसाल है।

वहीं, झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में NIA कोर्ट में हो रही अंतिम सुनवाई को लेकर भी दीपक बैज ने सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि झीरम घाटी हमले में शहीद हुए परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं और अब सवाल यह है कि क्या इस सुनवाई के बाद घटना की पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी। बैज ने पूछा कि क्या सरेंडर करने वाले नक्सलियों से इस मामले में पूछताछ हुई है और क्या तत्कालीन सरकार से जुड़े लोगों के नाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि झीरम घाटी की घटना में शहीद हुए परिवारों को न्याय मिलना जरूरी है और इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। बैज ने आरोप लगाया कि घटना के समय भाजपा की सरकार थी, इसलिए सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतने वर्षों बाद भी मामले की पूरी सच्चाई क्यों सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि अंतिम सुनवाई के बाद प्रदेश की जनता और शहीद परिवारों को उम्मीद है कि झीरम घाटी हमले से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिलेंगे और वास्तविकता सामने आएगी।