
शिवकुमार डहरिया ने कहा कि भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद ने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन और चंदा अभियान के जरिए लोगों की श्रद्धा का लाभ उठाया, लेकिन अब चंदे और चढ़ावे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राम शिला पूजन के नाम पर एकत्रित कथित हजारों करोड़ रुपये का हिसाब देश के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है।
प्रेसवार्ता में रायपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार शंकर मेनन ने कहा कि यदि ट्रस्ट के कामकाज में कोई अनियमितता नहीं हुई, तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों के इस्तीफे क्यों हुए और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग स्वीकार क्यों नहीं की जा रही है।
रायपुर ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि कथित रूप से जुड़े सभी प्रभावशाली लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की। पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर पारदर्शी व्यवस्था के साथ नए ट्रस्ट के गठन की मांग उठाई, जबकि पूर्व विधायक अनीता योगेंद्र शर्मा ने राम मंदिर के लिए मिले चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद और खर्च का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

