पखांजूर। कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र में किसानों को कथित तौर पर नकली या घटिया गुणवत्ता की DAP खाद बेचे जाने की शिकायत सामने आने के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है। मामला पीवी-85 गांव का है, जहां एक किसान ने गांव के ही एक व्यक्ति से 2300 रुपये में DAP खाद खरीदी थी। किसान का दावा है कि खेत में खाद डालने के बाद वह सामान्य तरीके से मिट्टी में घुलने के बजाय पत्थर की तरह पड़ी रही। वहीं, खाद डालने के बाद धान की फसल की बढ़वार पर भी अपेक्षित असर नजर नहीं आया। शिकायत मिलने के बाद कृषि विभाग की टीम गांव पहुंची और खाद के नमूने जांच के लिए एकत्र किए हैं।
जानकारी के अनुसार, पीवी-85 गांव के किसान ने खेती के लिए DAP खाद की जरूरत होने पर गांव में ही एक व्यक्ति से खाद खरीदी थी। इसके लिए किसान ने करीब 2300 रुपये का भुगतान किया। किसान ने खाद को धान के खेत में इस्तेमाल किया, लेकिन कुछ समय बाद उसे खाद की गुणवत्ता को लेकर संदेह हुआ। किसान के मुताबिक, खाद खेत में डालने के बाद सामान्य तरीके से घुलने के बजाय काफी समय तक पत्थर जैसी स्थिति में पड़ी रही। किसान ने यह भी बताया कि खाद के इस्तेमाल के बाद धान की फसल की बढ़वार में कोई खास अंतर दिखाई नहीं दिया। सामान्य तौर पर किसान खाद का इस्तेमाल फसल की बेहतर वृद्धि और उत्पादन के लिए करते हैं। ऐसे में खाद के अपेक्षित तरीके से काम नहीं करने पर किसान को नुकसान की आशंका सताने लगी। इसके बाद किसान साधन विश्वास और अन्य किसानों ने खाद की गुणवत्ता को लेकर किसान हेल्पलाइन पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित क्षेत्र में टीम भेजी। कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पीवी-85 गांव पहुंचकर किसानों से खाद की खरीद और उसके इस्तेमाल के संबंध में जानकारी ली। टीम ने किसानों से यह भी जानकारी जुटाई कि खाद किससे खरीदी गई, इसके लिए कितनी राशि का भुगतान किया गया और खाद का इस्तेमाल खेतों में किस तरह किया गया। जांच के दौरान कृषि विभाग की टीम ने मौके से खाद के नमूने भी एकत्र किए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए भेजा जाएगा। अब पूरे मामले की वास्तविकता जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। रिपोर्ट से यह पता चलेगा कि खाद निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप है या नहीं और किसानों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है।
पखांजूर क्षेत्र महाराष्ट्र की सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में किसानों ने खाद की कथित अवैध आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ व्यापारी महाराष्ट्र से खाद लाकर स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों में बेच रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। किसानों का कहना है कि खेती के मौसम में पहले ही खाद और अन्य कृषि सामग्री महंगी कीमतों पर खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में यदि किसान महंगे दाम पर खाद खरीदता है और बाद में वह नकली या घटिया गुणवत्ता की निकलती है तो इसका सीधा असर उसकी फसल और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। किसानों के मुताबिक, फसल में खाद का सही असर नहीं होने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है और दोबारा खाद खरीदने का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ सकता है।
किसानों ने कृषि विभाग से खाद की बिक्री और आपूर्ति व्यवस्था की जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में खाद बेचने वाले व्यापारियों और दुकानदारों की भी निगरानी की जानी चाहिए, ताकि किसानों को निर्धारित गुणवत्ता की खाद उचित दर पर मिल सके। साथ ही किसानों ने मांग की है कि यदि जांच में खाद नकली या अमानक पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल कृषि विभाग द्वारा लिए गए खाद के सैंपल की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पीवी-85 गांव में किसानों को बेची गई DAP खाद वास्तव में नकली थी, अमानक थी या फिर खाद के इस्तेमाल से जुड़ी किसी अन्य वजह से खेत में उसके घुलने में समस्या आई।
रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस मामले ने एक बार फिर किसानों को कृषि सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है। खाद खरीदते समय बिल लेने, पैकेट की सील, बैच नंबर, कंपनी का नाम और अन्य जरूरी जानकारी की जांच करने की सलाह दी जाती है। वहीं, कृषि विभाग के लिए भी अब चुनौती यह है कि जांच जल्द पूरी कर किसानों के बीच बनी आशंका को दूर किया जाए और यदि अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
