रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रदेश में संचालित बाल एवं बालिका संरक्षण गृहों और बाल संप्रेक्षण गृहों की पहचान को अधिक सकारात्मक और बालहितैषी बनाने की दिशा में पहल की है। उन्होंने इन संस्थाओं के मौजूदा औपचारिक नामों की जगह ऐसे नाम रखने की अनुशंसा की है, जो बच्चों में अपनत्व, आत्मसम्मान, सुरक्षा और सकारात्मक सोच की भावना को बढ़ावा दें। इस संबंध में उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया है।
आयोग ने जम्मू में बाल संरक्षण संस्थाओं के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ‘पलाश’ और ‘परिषा’ जैसे सकारात्मक एवं गरिमापूर्ण नामों का उदाहरण देते हुए छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह के नाम अपनाने का सुझाव दिया है। डॉ. वर्णिका शर्मा का मानना है कि किसी संस्था का नाम वहां रहने वाले बच्चों की मानसिकता और सामाजिक पहचान पर असर डाल सकता है। इसलिए नाम ऐसा होना चाहिए, जिससे बच्चों में हीनभावना के बजाय आत्मविश्वास, सम्मान और सुरक्षा की भावना मजबूत हो। उन्होंने जिलों में नाम तय करते समय स्थानीय भाषा, संस्कृति, प्रकृति, लोक परंपरा और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े प्रेरणादायक नामों को प्राथमिकता देने की बात कही है।
आयोग ने नए नाम तय करने की प्रक्रिया में संबंधित संस्थाओं में रहने वाले बच्चों, देखरेखकर्ताओं और अन्य हितधारकों से सुझाव लेने की भी अनुशंसा की है। इससे बच्चों को अपनी संस्था की नई पहचान तय करने की प्रक्रिया में शामिल करने और उनमें अपनत्व की भावना विकसित करने में मदद मिलेगी। महिला एवं बाल विकास विभाग से जिलों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर प्रस्तावित नामों की सूची मंगाने और की गई कार्रवाई की जानकारी आयोग को 21 सितंबर तक लिखित रूप से उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
