CG BREAKING: साइबर अपराधियों पर बड़ा प्रहार, 122 गिरफ्तार

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दुर्ग। साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टे के बढ़ते मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए दुर्ग पुलिस ने वर्ष 2026 में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है। विशेष अभियान के तहत जिले में संचालित 1242 म्यूल बैंक खातों की पहचान कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की गई है। इस दौरान 117 म्यूल खाताधारकों और 5 म्यूल एजेंटों सहित कुल 122 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। साथ ही विभिन्न साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टा मामलों से जुड़ी करीब ₹3 करोड़ की विवादित राशि फ्रीज (होल्ड) कर दी गई है, जिससे अपराधियों तक रकम पहुंचने से पहले ही रोक दी गई।

दुर्ग पुलिस ने बताया कि यह विशेष अभियान 1 जनवरी 2026 से 29 जुलाई 2026 तक संचालित किया गया। अभियान के दौरान पुलिस मुख्यालय तकनीकी सेवा (साइबर), भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), विभिन्न राज्यों से प्राप्त शिकायतों और बैंकिंग संस्थानों से मिली जानकारियों का तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान यह सामने आया कि साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन सट्टा और कस्टमर केयर फ्रॉड जैसे अपराधों में अर्जित धनराशि को छिपाने और आगे भेजने के लिए बड़े पैमाने पर म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

पुलिस ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में संचालित बैंक खातों के लेन-देन, केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग लॉग, यूपीआई ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। इसके बाद कुल 18 प्रकरणों में अपराध दर्ज कर 1242 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई। जांच के दौरान इन खातों से जुड़े 117 खाताधारकों और पांच म्यूल एजेंटों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा लगभग तीन करोड़ रुपये की विवादित राशि को फ्रीज कर आगे के लेन-देन और निकासी पर रोक लगा दी गई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार तकनीकी जांच के दौरान अभी भी करीब 2000 अन्य संदिग्ध म्यूल बैंक खातों का पता चला है। इन खातों का वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण जारी है। खातों से जुड़े खाताधारकों, एजेंटों और अन्य सहयोगियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी चरणबद्ध तरीके से वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान कुछ बैंक शाखाओं के अधिकारियों और बैंक प्रबंधकों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। पुलिस यह जांच कर रही है कि खाते खोलने, केवाईसी सत्यापन, संदिग्ध लेन-देन की निगरानी और बैंकिंग नियमों के पालन में कहीं लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। यदि जांच में किसी अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी आरोपी बनाकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी

पुलिस ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को नौकरी, कमीशन, आसान कमाई और अन्य आर्थिक प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते हासिल करते थे। कई मामलों में लोगों के नाम से नए खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद खाताधारकों से एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, सिम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग यूजर आईडी, पासवर्ड और यूपीआई आईडी तक ले ली जाती थी। कुछ खाताधारक कमीशन लेकर स्वयं लेन-देन करते थे, जबकि कई मामलों में पूरा बैंकिंग संचालन अपराधियों के नियंत्रण में रहता था। साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टे से प्राप्त रकम सबसे पहले इन म्यूल खातों में जमा कराई जाती थी।

इसके बाद कुछ ही मिनटों में रकम को अलग-अलग बैंकों के कई खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। इसके बाद एटीएम, यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, ई-वॉलेट और नकद निकासी के जरिए यह रकम मुख्य अपराधियों तक पहुंचाई जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ म्यूल एजेंट कमीशन लेकर बड़ी संख्या में बैंक खाते उपलब्ध कराने और साइबर गिरोहों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम कर रहे थे। दुर्ग पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, आईपी लॉग, यूपीआई ट्रांजेक्शन, केवाईसी दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे मनी ट्रेल की जांच शुरू कर दी है।

इसी आधार पर पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और सहयोगियों तक पहुंचने की कार्रवाई लगातार जारी है। दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, सिम कार्ड, ओटीपी, यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें। कमीशन या लालच में अपना बैंक खाता उपलब्ध कराना भी कानूनन अपराध है और इसके लिए खाताधारक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति बैंक खाता किराये पर लेने या बैंकिंग सुविधाओं के उपयोग का प्रस्ताव देता है, तो इसकी सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या निकटतम पुलिस थाने में देने की अपील की गई है।