नई दिल्ली। हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली भड़ल्या नवमी इस साल विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए बेहद खास मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि इस सीजन का आखिरी ‘अबूझ मुहूर्त’ है। इसके बाद 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू हो जाएगा, जिसके चलते अगले चार महीनों तक शादी, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, भड़ल्या नवमी को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है। इस दिन विवाह जैसे शुभ कार्यों के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। यही वजह है कि इस अवसर पर बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं।
इस वर्ष भड़ल्या नवमी की तिथि 22 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश, भगवान शिव और माता दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र और अन्य वस्तुओं का दान कर पुण्य प्राप्त करने की कामना करते हैं।धार्मिक परंपरा के अनुसार, देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने के कारण शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है। इसके बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत देवउठनी एकादशी के साथ दोबारा होगी।

