जशपुर। जिले में मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए कृषि विभाग किसानों को जैविक खेती के उपाय अपनाने के लिए जागरूक कर रहा है। विभाग द्वारा हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि भूमि का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। कृषि विभाग के अनुसार, ढैंचा और सनई जैसी फसलों से तैयार हरी खाद मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने में सहायक होती है। इसके उपयोग से भूमि की संरचना सुधरती है और लंबे समय तक उत्पादन क्षमता बनी रहती है। साथ ही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है।
किसानों को गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और फसल अवशेषों को खेतों में मिलाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि, जैविक और रासायनिक खादों का वैज्ञानिक संतुलन बनाकर उपयोग करने से खेती की लागत घटेगी और उत्पादन बेहतर होगा। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को खेत की मिट्टी के अनुसार पोषक तत्वों की जानकारी और उर्वरक उपयोग की सलाह दी जा रही है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि, वे मिट्टी की जांच के आधार पर खाद का इस्तेमाल करें और पर्यावरण अनुकूल खेती को अपनाकर कृषि को मजबूत बनाएं।

