कोरबा। कोरबा के मां सर्वमंगला मंदिर घाट पर रविवार की शाम एक अलौकिक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर ‘नमामि हसदेव सेवा समिति’ द्वारा भव्य हसदेव महाआरती का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और हजारों दीपों की जगमगाहट के बीच जब हसदेव मैया की महाआरती शुरू हुई, तो पूरा घाट भक्ति और आस्था के रस में सराबोर हो उठा। इस अनूठे आयोजन में केवल श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता भी अपनी जीवनदायिनी नदी को बचाने के लिए एकजुट हुए।
इस दौरान उपस्थित मुख्य यजमान और विशिष्ट अतिथियों ने समिति के इस जमीनी प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की। वनवासी कल्याण आश्रम के प्रांत उपाध्यक्ष महेश गुप्ता और विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने कहा कि हसदेव नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि कोरबा की जीवनरेखा है। भारतीय संस्कृति में नदियों को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए इन्हें प्रदूषण मुक्त रखना हमारी नैतिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति जगाने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।
मैया की भव्य आरती के बाद घाट पर मौजूद हजारों लोगों ने हसदेव नदी और उसकी सहायक कछारों को स्वच्छ, अविरल और प्रदूषण मुक्त रखने का सामूहिक संकल्प लिया। समिति के सदस्यों ने बताया कि हर पूर्णिमा को होने वाली यह आरती अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसका एकमात्र मकसद आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखना है। अंत में महाप्रसाद वितरण के साथ इस भव्य और संदेशात्मक उत्सव का समापन हुआ।
