‘इतनी धीमी रफ्तार कि घोंघा भी सवाल उठाए’, 9 साल पुराने केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Follow Us

नई दिल्ली। न्यायिक प्रक्रिया में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक पुराने मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मुकदमे की गति इतनी धीमी है कि इस पर “घोंघा भी सवाल उठा सकता है।” जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ एक निजी कंपनी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला वर्ष 2015 में शुरू हुआ था, लेकिन करीब 9 साल बाद भी इसमें वादी पक्ष के सबूत दर्ज किए जा रहे हैं। अदालत ने इतनी लंबी प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त की।

मामले में कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड में शामिल करने और एक गवाह को दोबारा जिरह के लिए बुलाने की मांग खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कंपनी की अपील खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि, मुकदमे के दौरान बार-बार नए दस्तावेज और आवेदन स्वीकार करने से न्याय प्रक्रिया लंबी होती जाएगी। अदालत ने साफ किया कि वाणिज्यिक मामलों में टुकड़ों में सुनवाई की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि इस पुराने मुकदमे का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए।