रायपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो कभी नक्सलवाद के खौफनाक साए में घिरा रहता था, आज भयमुक्त होकर विकास और विश्वास की एक नई इबारत लिख रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प के कारण आज बस्तर का अंदरूनी इलाका ‘खूनी गनतंत्र’ से निकलकर जनतंत्र की मुख्यधारा में शामिल हो चुका है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बस्तर दौरा इस आमूलचूल परिवर्तन की गवाही देता है। उन्होंने घोषणा की कि सुरक्षा बलों (DRG और COBRA) के अदम्य साहस की बदौलत देश पूरी तरह से नक्सलवाद के दंश से मुक्त हो चुका है। सरकार का अब एकमात्र लक्ष्य बस्तर को अगले 3 से 5 वर्षों में विकास के उस मुकाम पर पहुँचाना है, जिसका नुकसान उसने पिछले 50 सालों में झेला है।


इस बदलते बस्तर की सबसे खूबसूरत तस्वीर यहाँ के सुरक्षा कैंपों का जनसेवा केंद्रों में तब्दील होना है। जगदलपुर के नेतानार में पुराने कैंप को “शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा” में बदल दिया गया है, जहाँ अब आदिवासी ग्रामीणों को सरकारी दस्तावेज जैसे प्रमाण पत्र और पहचान पत्र बनवाने, आयुष्मान भारत तथा महतारी वंदन योजना का लाभ उठाने के लिए मीलों पैदल नहीं चलना पड़ता। इसके अलावा, महिलाएं स्व-सहायता समूहों और इमली प्रसंस्करण केंद्रों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं, और गाँवों में ‘बैंक सखी’ के रूप में बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं।


वहीं, मुख्यधारा में लौटने वाले पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार ने 20 करोड़ रुपये का फंड जारी कर उनके शिक्षा और कौशल विकास का मार्ग प्रशस्त किया है। बस्तर 2.0 विजन के तहत सड़क, बिजली, पानी और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ यहाँ की अनूठी संस्कृति, हस्तशिल्प और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का काम तेजी से जारी है।

