भाजपा पर आदिवासी समाज की पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को मिटाने का प्रयास करने का लगाया आरोप
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजाति गौरव दिवस के बजाय ‘आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाने की मांग की है। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)। पर आदिवासी समाज की अलग पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को प्रभावित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।
दीपक बैज ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के गौरव और संघर्ष के प्रतीक हैं। ऐसे में उनकी जयंती को आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासी समाज को वनवासी और जनजाति के रूप में संबोधित कर उसकी मूल पहचान बदलने का प्रयास कर रही है। आदिवासी समाज अपनी पहचान को लेकर सजग है और इस तरह के प्रयासों का विरोध करता है।
बैज ने कहा कि भाजपा ने पहले विश्व आदिवासी दिवस का विरोध किया था। आदिवासी समाज अपनी परंपराओं, संस्कृति और विरासत पर गर्व करते हुए यह दिवस मनाता है, लेकिन भाजपा लगातार उसे जनजाति के नाम से संबोधित करने पर जोर दे रही है। उन्होंने आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदले जाने पर भी सवाल उठाए।
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कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आरएसएस की विचारधारा के प्रभाव में आदिवासी संस्कृति और विशिष्ट पहचान को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां के आदिवासी समाज, उसकी समृद्ध संस्कृति, भाषा, परंपराओं और जीवनशैली से जुड़ी है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आदिवासी समाज की भावनाओं और पहचान का सम्मान करे।
बैज ने सवाल उठाया कि विभाग का नाम बदलने से आदिवासी परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में क्या वास्तविक लाभ मिला है? उन्होंने कहा कि नाम परिवर्तन के बजाय सरकार को आदिवासी समाज के बुनियादी विकास पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब आदिवासी समाज स्वयं अपनी पहचान को लेकर आपत्ति जता रहा है, तब सरकार को अपनी पसंद का नाम उस पर थोपने का अधिकार नहीं है। बैज ने मांग की कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजाति गौरव दिवसÓ के बजाय ‘आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाया जाए।
