पीएम-किसान की 24वीं किस्त से मिली आर्थिक राहत
सुकमा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात के बनासकांठा से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त जारी करते ही सुकमा जिले के 20,528 किसानों के बैंक खातों में 4.12 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे अंतरित की गई। शुक्रवार को जारी की गई इस आर्थिक सहायता से किसानों को रबी सीजन की तैयारियों के साथ बीज, खाद एवं अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति में मदद मिलेगी। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग सुकमा के संयुक्त तत्वावधान में एक्सटेंशन रिफॉर्म (आत्मा) योजनांतर्गत कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा सह पीएम-किसान उत्सव दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष धनीराम बारसे, जिला महामंत्री विश्वराज सिंह चौहान एवं मुरतोण्डा के सरपंच मुक्का नाग अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 115 किसानों एवं 18 अधिकारियों ने सहभागिता की। इस दौरान जनप्रतिनिधि धनीराम बारसे ने किसानों को पीएम-किसान की किस्त मिलने पर बधाई देते हुए कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने और वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की। वहीं उप संचालक कृषि पी.आर. बघेल ने योजना की उपयोगिता बताते हुए ई-केवाईसी, आधार सीडिंग, एग्रीस्टैक पंजीयन एवं बैंक खाते का सत्यापन समय पर पूरा रखने की समझाइश दी। उन्होंने फसल बीमा योजना एवं कृषक उन्नति योजना की जानकारी भी दी।
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कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा में आगामी रबी सीजन की बेहतर तैयारी और उन्नत कृषि तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख राजेन्द्र प्रसाद कश्यप ने किसानों को गुणवत्तायुक्त बीजों का चयन, बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा वैज्ञानिक फसल उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसान फसल उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि कर सकते हैं। साथ ही किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों की बेहतर योजना बनाने और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में जिले के 100 हेक्टेयर क्षेत्र में समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के तहत लगाई गई तिल की फसल के उन्नत उत्पादन एवं संरक्षण पर भी विशेष चर्चा हुई। कृषि वैज्ञानिकों ने तिल में लगने वाले प्रमुख कीटों एवं रोगों की पहचान, उनके प्रकोप के लक्षण, समय पर रोकथाम तथा वैज्ञानिक प्रबंधन के उपायों की विस्तार से जानकारी दी। किसानों को फसल की नियमित निगरानी और समन्वित कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आर्थिक सहायता के साथ आधुनिक कृषि ज्ञान एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर खेती को अधिक लाभकारी और उत्पादन को अधिक प्रभावी बनाना रहा।
