- अर्नब का असर किसानों पर पड़ा,
- 36 घंटे से तेज हवा-बारिश, 30 हजार प्रति एकड़ मुआवजे की मांग – सर्वे अब तक शुरू नहीं, टंकराम बोले RBC 6-4 में मिलेगा मुआवजा
रायपुर। ( तुमेश साहू ) चक्रवाती तूफान अर्नब का असर प्रदेश की किसानों पर दोहरी पड़ रही है। 36 घंटों से तेज हवाओं के साथ जारी बारिश ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। प्रदेश में अब तक धान की 10 प्रतिशत कटाई भी नहीं हो पाई है और खेत में पकी फसल खराब होना शुरू हो गई है। कहीं पकी फसल जमीन पर गिर गई है तो कहीं खेतों में पानी भर गया है। खरीफ की धान पककर तैयार थी, किसान कटाई की तैयारी में थे, लेकिन बारिश से रायपुर, बस्तर समेत कई जिलों में फसल जमीन पर गिर गई।
\खेतों में नमी और जलभराव से हार्वेस्टर नहीं उतर पा रहे हैं। रायपुर के एक किसान ने वीडियो जारी कर खेत में पानी भरने की स्थिति दिखाई है। सब्जी की फसल भी सड़ने की कगार पर है। किसानों का कहना है कि लगातार नमी से गिरी हुई बालियों के दाने बदरंग हो रहे हैं। लंबे समय तक पानी रहने से दानों में अंकुरण शुरू होने का खतरा है, जिससे गुणवत्ता गिरेगी और समर्थन मूल्य पर बेचने में परेशानी आएगी। मंडी में रिजेक्शन का डर किसानों को सता रहा है। किसानों ने तत्काल सर्वे और 30 हजार रुपए प्रति एकड़ क्षतिपूर्ति की मांग की है। हालांकि अभी तक प्रशासनिक सर्वे शुरू नहीं हुआ है।
प्रशासन का कहना है बारिश थमने के बाद टीमें निकलेंगी। आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा है कि अनावरी रिपोर्ट के आधार पर आकलन होगा और पात्र किसानों को फसल बीमा तथा RBC 6-4 के तहत मुआवजा दिया जाएगा।चक्रवात से जनजीवन के साथ किसान की अर्थव्यवस्था भी बेपटरी हो गई है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो छत्तीसगढ़ में धान के उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर बड़ा असर पड़ेगा।
प्रशासन की सलाह – कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि जिन खेतों में पानी भरा है, वहां निकासी करें। पकी फसल को जल्द काटकर सुरक्षित स्थान पर रखें। गेहूं, चना, मसूर की बुआई फिलहाल टाल दें। मौसम विभाग ने बस्तर संभाग के पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, 60-70 किमी प्रति घंटे की हवा की आशंका है।
फसल नुकसान का होगा आकलन: टंकराम
छत्तीसगढ़ में बारिश से फसलों को हो रहे नुकसान पर आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हवा और बारिश से कुछ जगहों पर फसलें प्रभावित हुई हैं। नुकसान का आकलन अनावरी रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। पात्र किसानों को फसल बीमा और आरबीसी 6-4 के प्रावधानों के तहत मुआवजा दिया जाएगा। किसानों को सलाह दी गई है कि पकी धान की जल्द कटाई करें और कटी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें। इसके अलावा गेहूं, चना और मसूर की बुआई फिलहाल टालने की सलाह दी गई है।
पकी फसल जमीन पर गिरी
खेतों में खरीफ की धान फसल पककर तैयार है, लेकिन बारिश के चलते कहीं धान की फसल जमीन पर गिर गई है, तो कहीं खेतों में पानी भरने से कटाई प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में किसानों को दोहरी मार का डर सता रहा है। आखिर कैसे बेमौसम बारिश किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकती है। खेतों में धान की फसल पककर तैयार है और किसान कटाई की तैयारी में जुटे हुए हैं, लेकिन बारिश के चलते कई जगह पक चुकी धान की फसल जमीन पर गिर गई है। खेतों में नमी और जलभराव के कारण फसल की कटाई में देरी होने की आशंका भी बढ़ गई है।
धन के बदरंग होने का खतरा
इस बारिश का असर सिर्फ धान की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है। लगातार नमी बने रहने से खेतों में गिरी धान की बालियों के दाने बदरंग हो सकते हैं। वहीं, लंबे समय तक पानी और नमी रहने से दानों में अंकुरण का खतरा भी बढ़ सकता है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ, तो किसानों को उपज की गुणवत्ता में गिरावट के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
अधपकी फसल पर कीट प्रकोप का खतरा
किसानों की चिंता उन खेतों को लेकर भी है, जहां धान की बालियां निकल चुकी हैं, लेकिन फसल अभी पूरी तरह पक नहीं पाई है। लगातार बारिश और बादलों के कारण फसल में कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ने की आशंका है। ऐसे में किसानों के सामने फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। उत्पादन में कमी और धान की गुणवत्ता प्रभावित होने पर समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के दौरान भी परेशानी आ सकती है।
सरकार 70,518 रुपए प्रति एकड़ एकमुश्त मुआवजा दे
फसल नुकसान को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि बेमौसम और प्राकृतिक मार से धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। हम स्पष्ट मांग करते हैं कि सरकार तत्काल सर्वे करवा कर फसल नुकसानी का आकलन करे और जहां पर भी फसल पूरी तरह खराब हुआ है, वहां धान के लिये 3358 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ अर्थात 70,518 रुपए प्रति एकड़ एकमुश्त मुआवजा देने का ऐलान करें। उन्होंने ने कहा कि खराब मौसम, कीट प्रकोप और अतिवृष्टि से किसानों की खरीफ फसल, विशेषकर धान पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। सरकार ने अब तक कोई ठोस सर्वे या नुकसानी का आकलन नहीं कराया है। प्रशासनिक उदासीनता ने किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।


