नई दिल्ली । कैंसर के इलाज को सस्ता और आम लोगों की पहुंच में लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर रोधी दवाओं के 543 ब्रांड की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमतें जारी की हैं। नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होंगी। सरकार ने 137 ऐसी कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापारिक लाभांश को 30 प्रतिशत तक सीमित करने का निर्णय लिया है, जिनकी कीमतें पहले निर्धारित अधिकतम सीमा के अंतर्गत नहीं आती थीं। इस कदम का उद्देश्य दवाओं की आपूर्ति और बिक्री श्रृंखला में अत्यधिक लाभांश को कम करना तथा मरीजों को जरूरी दवाएं कम कीमत पर उपलब्ध कराना है।
औषध विभाग के अनुसार, संशोधित मूल्य सूची में दवा कंपनियों की ओर से 27 अक्टूबर तक उपलब्ध कराई गई जानकारी को शामिल किया गया है। निर्माता कंपनियों से नई कीमतों से संबंधित जानकारी मिलने के साथ ही एनपीपीए सूची को अद्यतन करता रहेगा।
संशोधित सूची में स्तन, प्रोस्टेट, आंत, अंडाशय और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर सहित विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें प्रतिरक्षा आधारित उपचार, लक्षित कैंसर उपचार और कीमोथेरेपी के दौरान मरीजों को दी जाने वाली सहायक दवाएं भी शामिल हैं।
कई दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती
संशोधित दरों के तहत कई दवाओं की कीमतों में उल्लेखनीय कमी की गई है। प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं—
• एनास्ट्रोजोल की गोली: आरपीजी लाइफ साइंसेज की ‘एनार्जोल ब्रांड की एक मिलीग्राम की 10 गोलियों वाली पट्टी की कीमत 695.76 रुपये से घटकर 73 रुपये हो जाएगी।
• एजासिटिडाइन इंजेक्शन: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के ‘एजासिटिन इंजेक्शन की कीमत 6,337 रुपये से घटकर 1,495.04 रुपये हो जाएगी।
• बेवासिजुमैब इंजेक्शन: एबॉट हेल्थकेयर की चार मिलीलीटर की शीशी की कीमत 21,767.70 रुपये से घटकर 5,930.13 रुपये हो जाएगी।
• दसनत की गोली: 20 मिलीग्राम की गोली की कीमत 2,812.50 रुपये से घटकर 1,085.93 रुपये हो जाएगी।
• फुलब्रेका इंजेक्शन: इसकी कीमत 26,072.16 रुपये से घटकर 5,491 रुपये हो जाएगी।
इन संशोधित दरों से संबंधित ब्रांड की दवाएं इस्तेमाल करने वाले मरीजों का उपचार खर्च कम होने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक बचत मरीज की बीमारी, उपचार पद्धति और निर्धारित दवाओं पर निर्भर करेगी।
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सरकार ने 17 अक्टूबर को घोषित नीति के तहत औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप 137 चिह्नित गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापारिक लाभांश को 30 प्रतिशत तक सीमित किया है। अनुसूचित दवाओं की कीमतें पहले से निर्धारित अधिकतम सीमा के अधीन होती हैं, जबकि गैर-अनुसूचित दवाओं के मामले में यह कदम वितरण और खुदरा बिक्री श्रृंखला में अत्यधिक लाभांश को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
सरकार का अनुमान है कि इस पहल से कैंसर मरीजों को हर साल लगभग 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। यह कदम वर्ष 2019 में शुरू की गई उस पहल की अगली कड़ी है, जिसके तहत 42 कैंसर रोधी दवाओं को शामिल कर उनके सैकड़ों ब्रांड की कीमतों में कमी की गई थी।
औषध विभाग के अनुसार, 9 नवंबर से दवा विक्रेताओं और अस्पतालों को संशोधित कीमतों के अनुसार दवाएं उपलब्ध करानी होंगी। निर्माता कंपनियों को आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े पक्षों को नई दरों की जानकारी देनी होगी। वहीं, राज्य औषधि नियंत्रकों से कीमतों के पालन की निगरानी करने की अपेक्षा की गई है। एनपीपीए ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों से अतिरिक्त जानकारी मिलने पर संशोधित मूल्य सूची में आगे भी बदलाव किए जा सकते हैं।
कैंसर की दवाओं की ऊंची कीमतों का मुद्दा हाल के दिनों में संसद की स्वास्थ्य संबंधी समिति की बैठकों में भी उठाया गया था। समिति ने भारत में कैंसर का उपचार अधिक किफायती बनाने के उपायों पर विभिन्न पक्षों से सुझाव लिए थे।
सुप्रीम कोर्ट भी कैंसर की दवाओं की अत्यधिक कीमतों पर गंभीर चिंता जता चुका है। ऐसे में सरकार की इस पहल को मरीजों पर उपचार के आर्थिक बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, कैंसर के समग्र उपचार खर्च में दवाओं के अलावा जांच, अस्पताल में भर्ती, शल्य चिकित्सा और अन्य उपचार प्रक्रियाओं की लागत भी शामिल होती है।
