ईवी और डिजिटल लॉक: जरूरत या घर में बैठा अदृश्य खतरा? – रंजन श्रीवास्तव

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इंदौर की हृदयविदारक घटना जिसमें 8 लोगों की मौत हुई है, ने हमारे आधुनिक जीवन में दिन-प्रतिदिन इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हुई डिमांड और इससे जुड़े हुए गंभीर और जानलेवा खतरों को एक बार फिर से उजागर किया है. इस घटना में मौत होना तो दुखद है ही, इस घटना से जुड़ा और भी बड़ा दुखद पक्ष यह है कि इस घटना को टाला जा सकता था. हालांकि पुलिस की जांच के बाद घटना के सभी कारणों का पता चलेगा पर प्रथम दृष्टया इस घटना में पुगलिया परिवार और उनके रिश्तेदारों की मौत के दो नहीं बल्कि तीन कारण थे. पहला, इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग को रात में चालू छोडऩा. दूसरा, आपातकाल में इलेक्ट्रॉनिक लॉक खोलने का कोई वैकल्पिक रास्ता न होना और तीसरा, घर में ज्वलनशील पॉलीमर का भंडारण. वैसे तो आधुनिक वाहनों में इतने सुरक्षा फीचर्स होते हैं कि ओवरचार्जिंग की अवस्था में आग नहीं लगती पर यह 100त्न सुरक्षित है ऐसा नहीं कहा जा सकता. स्वयं और वाहनों की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि वाहनों की अपेक्षित चार्जिंग के बाद चार्जिंग का स्विच ऑफ कर दिया जाए. वाहनों में लगी लिथियम-आयन बैटरी ओवरचार्ज होने पर अस्थिर हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी से ‘थर्मल रनवेÓ की स्थिति पैदा होती है, जो विस्फोट का कारण बन सकती है. इसके अलावा, ओवरचार्जिंग से एनोड पर ‘डेंड्राइटÓ जैसी सुईनुमा संरचनाएं बनती हैं, जो आंतरिक शॉर्ट सर्किट पैदा करती हैं. इंदौर में भी शुरुआती जांच में आग का कारण चार्जिंग के दौरान शॉर्ट-सर्किट ही माना जा रहा है. चूंकि घर में सभी लोग सोए हुए थे अत: शॉर्ट सर्किट के बारे में और इससे जो आग लगी उसके बारे में तुरंत पता ही नहीं चला. घर में पॉलीमर जैसा ज्वलनशील पदार्थ रखी हुई थी जिसने आग को और विकराल बना दिया. कई गैस सिलिंडर थे जिनमें आग पकडऩे के बाद एक के बाद एक विस्फोट होते गए. चूंकि शॉर्ट सर्किट और आग के कारण पावर सप्लाई बंद हो गई अत: इलेक्ट्रॉनिक लॉक जाम हो गया और आपातकालीन स्थिति में खुल नहीं पाया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मौतें आग और धुएं के कारण दम घुटने से हुई हैं.

लगभग 5 महीने पहले इंदौर में ही एक बिजनेसमैन और कांग्रेस नेता प्रवेश अग्रवाल के घर में आग के बाद दम घुटने से मृत्यु हो गई जबकि उनकी पुत्री गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराई गईं. प्रवेश अग्रवाल के घर में दीपावली के मौके पर अखंड ज्योति जली हुई थी संभवत: जिसके कारण घर में आग लगी. घर में हाई सिक्योरिटी इलेक्ट्रॉनिक लॉक लगा हुआ था जो इमरजेंसी के दौरान खुला नहीं. इंदौर की इन दोनों घटनाओं में एक बात सामान्य थी—स्मार्ट लॉक का फेल होना. आग लगने पर जब पावर सप्लाई कट जाती है, तो ये लॉक अक्सर ‘जामÓ हो जाते हैं. यदि इनमें मैन्युअल ओवरराइड यानी भौतिक चाबी का विकल्प न हो, तो घर के अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाते. इंदौर की घटना में यही हुआ—बिजली कटी, लॉक जाम हुआ और धुएं के कारण लोगों का दम घुट गया. अत: सुरक्षा के लिए हाई सिक्योरिटी फीचर्स वाले लॉक की स्थिति में ऐसे उपायों का भी होना जरूरी है जिससे ऐसे लॉक अंदर से मैनुअल तरीके से खुल जाएं. और मार्केट में ऐसे फीचर्स वाले लॉक उपलब्ध भी हैं. विशेषज्ञ इस बात के लिए भी बार-बार आगाह करते हैं कि इलेक्ट्रिक गैजेट्स में सब-स्टैंडर्ड बैटरी का उपयोग ना करें और सुरक्षा के सभी और इमरजेंसी के दौरान काम आने वाले उपायों को हमेशा ध्यान में रखते हुए ही इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का प्रयोग करें. साथ में घर के मुख्य द्वार के अलावा एक अन्य सुरक्षित निकास मार्ग या खिड़की पर रिमूवेबल ग्रिल होना जरूरी है. घर में ज्वलनशील पदार्थों का स्टोरेज खासकर ज्यादा मात्रा में स्टोरेज वैसे भी घातक है.