80 वर्षीय हासिम खान ने कलेक्टर से पटवारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की
बलरामपुर। ग्राम लुरगी की पैतृक भूमि के राजस्व अभिलेखों में रकबा कम दर्ज किए जाने और सक्षम राजस्व न्यायालय के आदेश का पूर्ण पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए रामानुजगंज निवासी करीब 80 वर्षीय हासिम खान ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने संबंधित पटवारी के खिलाफ जांच एवं दोष पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा राजस्व अभिलेखों को नियमानुसार दुरुस्त कराने की मांग की है।
आवेदन के अनुसार हासिम खान की पैतृक भूमि ग्राम लुरगी, तहसील रामानुजगंज में स्थित है। पुराना खसरा नंबर 2/14 में भूमि का रकबा 4.47 हेक्टेयर बताया गया है, जबकि वर्तमान खसरा नंबर 01 से संबंधित रिकॉर्ड में कथित रूप से 1.94 हेक्टेयर रकबा दर्ज है। आवेदक का कहना है कि इस संबंध में वर्षों से राजस्व विवाद चल रहा है।
आवेदक के अनुसार इस मामले में आयुक्त, सरगुजा संभाग, अंबिकापुर ने राजस्व अपील प्रकरण में 20 दिसंबर 2021 को आदेश पारित किया था। इसके बाद तहसीलदार रामानुजगंज द्वारा 17 जनवरी 2022 को आदेश के पालन के लिए संबंधित पटवारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि इसके बावजूद राजस्व अभिलेखों में भूमि का पूरा रकबा दर्ज नहीं किया गया।
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हासिम खान ने अपने आवेदन में दिनांक 8 मई 2026 और 20 मई 2026 को तैयार किए गए दस्तावेजों को लेकर भी विरोधाभास का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि 8 मई को संबंधित पटवारी द्वारा ग्रामवासियों की मौजूदगी में उक्त भूमि का सीमांकन किया गया था। वहीं, 20 मई को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में कथित रूप से आवेदक को भूमि की भौगोलिक स्थिति की जानकारी नहीं होने की बात कही गई।
आवेदक ने इस विरोधाभास की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि सीमांकन पंचनामा, मौके पर उपस्थित ग्रामीणों के बयान, पुराने एवं वर्तमान खसरा, नक्शा तथा अन्य राजस्व अभिलेखों का मिलान कराया जाए।
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स्वतंत्र जांच दल से जांच की मांग
हासिम खान ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की जांच वर्तमान संबंधित पटवारी से हटाकर किसी वरिष्ठ एवं स्वतंत्र राजस्व अधिकारी या जांच दल से कराई जाए। साथ ही वर्ष 1995-96 से वर्तमान तक के सभी राजस्व अभिलेखों की जांच, मौके पर पुन: सीमांकन और सक्षम न्यायालय के आदेश के अनुरूप रिकॉर्ड एवं नक्शे में आवश्यक दुरुस्ती कराने की मांग की गई है।
आवेदक ने कहा है कि उनकी उम्र करीब 80 वर्ष है और वे लंबे समय से अपनी भूमि एवं राजस्व अधिकारों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने मामले का समय-सीमा में निराकरण कर दोष पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
