सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में हिंदी पत्रकारिता प्रभावी सेतु : सुधा श्रीमाली

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‘फाइल से फील्ड तक योजनाओं की यात्रा पूरी करने में पत्रकारिता की अहम भूमिका; सरल, तथ्यपरक और उपयोगी सूचना से बढ़ती है जनभागीदारी

मुंबई। सरकारी योजना की घोषणा के बाद उसका वास्तविक प्रभाव तब शुरू होता है, जब उसकी जानकारी उस व्यक्ति तक पहुंचती है, जिसके लिए योजना बनाई गई है। योजनाओं की जटिल भाषा को आम लोगों की समझ के अनुरूप सरल बनाकर सही संदर्भ के साथ जनता तक पहुंचाना ही वह कड़ी है, जो सरकारी योजनाओं की ‘फाइल से फील्ड तक की यात्रा पूरी करती है। हिंदी पत्रकारिता इस प्रक्रिया में प्रभावी सेतु की भूमिका निभा सकती है। यह विचार नवभारत टाइम्स की बिजनेस संपादक सुधा श्रीमाली ने हिंदी माह के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किए।

कार्यक्रम की शुरुआत में अपर महानिदेशक सिद्धार्थ बोडखे ने सुधा श्रीमाली का स्वागत किया और विशेष व्याख्यान के लिए उनका अभिनंदन किया।“सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में हिंदी पत्रकारिता की भूमिका—विकसित भारत 2047 के संदर्भ में” विषय पर बोलते हुए सुधा श्रीमाली ने कहा कि सरकारी सूचनाओं को हिंदी में प्रस्तुत करना केवल शब्दों का अनुवाद करने तक सीमित नहीं है। सूचना के पीछे छिपे उद्देश्य, भावना और संदर्भ को समझकर उसे जनता की जरूरत के अनुरूप प्रस्तुत करना अधिक महत्वपूर्ण है। जब सही जानकारी सरल और उपयोगी रूप में लोगों तक पहुंचती है तो वह केवल सूचना नहीं रहती, बल्कि जनभागीदारी का माध्यम बन जाती है।

उन्होंने कहा कि किसी योजना की घोषणा होते ही आम नागरिक के मन में कई बुनियादी सवाल उठते हैं—योजना क्या है, इसका लाभ किसे मिलेगा, पात्रता क्या है और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या है? पत्रकारिता का दायित्व इन सवालों के सीधे और स्पष्ट जवाब देना है।

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि यानी पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समाचार का शीर्षक और प्रस्तुति ऐसी होनी चाहिए, जिससे पाठक पहली नजर में समझ सके कि योजना उसके लिए क्यों महत्वपूर्ण है और वह इसका लाभ किस प्रकार उठा सकता है। सुधा श्रीमाली ने कहा कि सूचना की दुनिया तेजी से बदल रही है। समाचार-पत्रों के साथ श्रव्य कार्यक्रम, सामाजिक माध्यम और अन्य डिजिटल मंचों ने सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी को पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक स्तर तक पहुंचाने की क्षमता पैदा की है। ऐसे समय में माध्यमों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखना है।

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उन्होंने कहा कि सरल और तथ्यपरक सूचना सरकार और जनता के बीच संचार के अंतर को कम करने के साथ-साथ अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार की संभावना को भी कम कर सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सूचना का प्रवाह केवल सरकार से मीडिया और फिर जनता तक एकतरफा नहीं होना चाहिए। पत्र सूचना कार्यालय की भूमिका मीडिया से प्राप्त प्रतिक्रियाओं को सरकार तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण है। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से मिलने वाले सवालों, प्रतिक्रियाओं और जमीनी अनुभवों के माध्यम से सूचना संबंधी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा सकता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में पत्रकारिता की भूमिका पर सुधा श्रीमाली ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल चुनौती के रूप में देखने के बजाय पत्रकारों के काम को अधिक प्रभावी बनाने वाले सहयोगी साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। तकनीक सूचना के विश्लेषण, प्रस्तुति और व्यापक प्रसार में मदद कर सकती है, लेकिन सूचना की सत्यता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की अंतिम जिम्मेदारी पत्रकारिता की ही रहेगी।

उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं की जानकारी आकर्षक होने के साथ उपयोगी भी होनी चाहिए, लेकिन इसका उद्देश्य योजनाओं का महिमामंडन करना नहीं, बल्कि उनकी मूल भावना और लाभ को सरल भाषा में जनता तक पहुंचाना होना चाहिए। हिंदी की व्यापक समझ और डिजिटल माध्यमों की बढ़ती पहुंच इसे और प्रभावी बनाती है। इस दृष्टि से हिंदी पत्रकारिता विकसित भारत 2047 के संकल्प को व्यापक जनभागीदारी के अभियान से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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पत्र सूचना कार्यालय, पश्चिम क्षेत्र की महानिदेशक स्मिता वत्स शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में सूचनाओं की अधिकता है। ऐसे में कार्यालय का लगातार प्रयास रहता है कि पत्रकारों के लिए आंकड़ों और सूचनाओं को छांटकर बेहद सरल रूप में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुविधा के लिए प्रेस विज्ञप्तियों के साथ पृष्ठभूमि सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। तस्वीरों के विस्तृत विवरण भी दिए जाते हैं, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में काम कर रहे पत्रकार विषय की पृष्ठभूमि को आसानी से समझ सकें। इसके अलावा विषय की व्यापक समझ सुनिश्चित करने के लिए विज्ञप्ति के साथ सामाजिक माध्यमों और सीधे प्रसारण के संपर्क भी साझा किए जाते हैं।

यह विशेष व्याख्यान पत्र सूचना कार्यालय, मुंबई की ओर से हिंदी माह के अवसर पर महानिदेशक स्मिता वत्स शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के पत्र सूचना कार्यालय और केंद्रीय संचार ब्यूरो के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के निदेशक मनीष गौतम ने सुधा श्रीमाली के प्रति आभार व्यक्त किया।