रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक कथावाचक का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथावाचक डॉ. रामानुरागी महाराज ने कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल पर श्रीमद्भागवत कथा करवाने के बाद भुगतान नहीं देने का आरोप लगाया है। इससे आहत होकर उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी है। हालांकि मंत्री राजेश अग्रवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि उनका इस आयोजन से कोई संबंध नहीं है और यह उनके ऊपर दबाव बनाने की कोशिश है।
वायरल वीडियो में कथावाचक का आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर वायरल वीडियो में कथावाचक डॉ. रामानुरागी महाराज ने कहा कि उन्होंने 2 जनवरी से 9 जनवरी 2026 तक अंबिकापुर के लखनपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया था। उनका आरोप है कि कथा समाप्त होने के बाद भी उन्हें पारिश्रमिक नहीं दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि जब भी वे भुगतान के लिए जाते हैं, तो उन्हें धक्का देकर किनारे कर दिया जाता है। उन्होंने कहा, “मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि क्या सनातन धर्म की यही मर्यादा है? एक संत का अपमान किया जा रहा है।” कथावाचक ने इसके बाद विधानसभा के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने आरोपों को बताया झूठा
मामले में मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक कथित भागवत कथाकार उन पर कथा करवाकर पैसा नहीं देने का आरोप लगा रहा है।
उन्होंने बताया कि भारतीय नमो सेवा दल नाम की एक संस्था द्वारा आवेदन दिया गया था, जिसमें लखनपुर में भागवत कथा आयोजन के लिए संस्कृति विभाग से लगभग 15 लाख रुपये की मांग की गई थी। मंत्री के अनुसार उन्होंने साफ कहा था कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए सरकार से धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जाती।
मंत्री ने कहा कि बाद में कथावाचक उनसे मिलने आए थे, लेकिन उनका इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं था। विभाग से स्वीकृति नहीं मिलने के बाद अब उन पर व्यक्तिगत रूप से पैसा देने का दबाव बनाया जा रहा है।
“न मैंने कथा करवाई, न कार्यक्रम में गया”
मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने न तो कथा का आयोजन करवाया और न ही लखनपुर में आयोजित कार्यक्रम में कभी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि न वे, न उनका परिवार और न ही उनके किसी प्रतिनिधि ने कार्यक्रम में भाग लिया।
उनके अनुसार आयोजकों द्वारा भुगतान नहीं किए जाने के कारण कथावाचक अब उन पर दबाव बना रहे हैं। मंत्री ने कहा कि यह आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए उन्होंने फिलहाल कथावाचक के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की है, लेकिन आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
