प्रभावी विवेचना से अपराधियों को 10 साल की सजा, कोर्ट मुहर्रिर आरक्षक खेमू राम साहू सम्मानित

Follow Us

जेवरा सिरसा के अपराध प्रकरण में पुलिस की प्रभावी जांच और न्यायालयीन समन्वय का परिणाम, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग ने दिया प्रशस्ति पत्र

दुर्ग। चौकी जेवरा सिरसा के एक आपराधिक प्रकरण में प्रभावी विवेचना और न्यायालयीन समन्वय के चलते अभियुक्तों को न्यायालय ने 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले में उत्कृष्ट न्यायालयीन समन्वय के लिए कोर्ट मुहर्रिर आरक्षक क्रमांक 307 खेमू राम साहू को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

चौकी जेवरा सिरसा, थाना पुलगांव के अपराध क्रमांक 247/2025 में धारा 296, 109 एवं 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। प्रकरण की प्रारंभिक विवेचना और आरोपियों की गिरफ्तारी तत्कालीन चौकी प्रभारी निरीक्षक प्रकाश कांत ने की। इसके बाद अग्रिम विवेचना तत्कालीन चौकी प्रभारी उप निरीक्षक खगेंद्र पठारे द्वारा पूरी कर अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।

प्रकरण की न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान माननीय न्यायालय ने 5 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाते हुए अभियुक्तों को धारा 109 सहपठित धारा 3(5) बीएनएस के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं धारा 296 बीएनएस के तहत एक माह के साधारण कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई। प्रकरण की विवेचना एवं आरोपियों की गिरफ्तारी में हेड कांस्टेबल 1481 पुनेश साहू, कांस्टेबल 969 वसीम खान, कांस्टेबल 1256 महिपाल यादव, कांस्टेबल 1349 नरोत्तम साहू, कांस्टेबल 1612 श्याम सिंह एवं कांस्टेबल 235 रामेश्वर कोमा का भी सहयोग रहा।

न्यायालयीन समन्वय में निभाई अहम भूमिका
न्यायालय में पदस्थ कोर्ट मुहर्रिर आरक्षक क्रमांक 307 खेमू राम साहू ने अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्रकरण से संबंधित समंस एवं वारंट की तामीली और वापसी सुनिश्चित की। साथ ही न्यायालयीन कार्यवाही से संबंधित जानकारी थाना एवं विवेचक तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने तथा अभियोजन एवं न्यायालय के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनकी तत्परता और कार्यकुशलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रभावी विवेचना के साथ न्यायालयीन प्रक्रिया में बेहतर समन्वय से अपराधियों को सजा दिलाने में मदद मिलती है।