नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन संपन्न

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*प्रधानमंत्री मोदी ने कहा—संकटों में सबसे आगे रहता है वैश्विक दक्षिण, निर्णय प्रक्रिया में भी मिले उचित स्थान*

नई दिल्ली । भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन हो गया। सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुले सत्र को संबोधित करते हुए वैश्विक दक्षिण की भूमिका, दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता और भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण अक्सर संकटों का सबसे पहले सामना करता है, लेकिन वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका अपेक्षाकृत कम रहती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। एक क्षेत्र में उत्पन्न संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित करता है। ऐसे में ब्रिक्स को भविष्य की चुनौतियों और संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयार रखने पर भारत ने विशेष जोर दिया है। शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सात देशों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।

उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डीनेंड आर. मार्कोस जूनियर, मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सीसी, बुरुंडी के राष्ट्रपति एवारिस्टे नदायिशिमिये, युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो और नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टीमा के साथ बातचीत की।

इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ व्यापार, विकास, वैश्विक परिस्थितियों और आपसी हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।सम्मेलन के पहले दिन भारत को महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता मिली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान, सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात के अलग-अलग रुख के बावजूद ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा पत्र को स्वीकार किया।

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घोषणा पत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। इसके अलावा एकतरफा शुल्क लगाने की प्रवृत्ति की निंदा और परमाणु खतरे को लेकर चिंता जताई गई है। घोषणा पत्र में किसी देश का नाम लिए बिना हर प्रकार की आक्रामकता की निंदा की गई है। सम्मेलन के पहले दिन के शुरुआती सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने नाविकों की सुरक्षा सहित 10 से अधिक प्रस्ताव रखे। उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था में नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इसके बाद ब्रिक्स नेताओं की बंद कमरे में बैठक हुई, जिसमें विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। ब्रिक्स समूह के गठन के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो विशेष डाक टिकट जारी किए। इसके बाद उन्होंने ब्रिक्स देशों के नेताओं को भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत नवाचार प्रदर्शनी दिखाई। नेताओं ने पौधारोपण कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया और सामूहिक तस्वीर खिंचवाई।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर चिंता जताते हुए कहा कि संघर्ष के कारण पूरे क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम अब कमजोर हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि ये देश स्वयं को सात देशों का समूह क्यों कहते हैं। पुतिन ने कहा कि दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों को किसी भी प्रकार के हमले से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उन्होंने शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में भारत ने विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को वैश्विक मंच पर मजबूत करने का प्रयास किया।

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सम्मेलन में आतंकवाद, क्षेत्रीय संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक प्रतिबंध, परमाणु सुरक्षा और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठे। भारत की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में विकासशील देशों को केवल संकटों का सामना करने वाला पक्ष नहीं, बल्कि वैश्विक नीतियों और निर्णयों को तय करने में सक्रिय भागीदार बनाया जाना चाहिए।