8 साल की स्वर्णि को मिली नई जिंदगी, दिल की गंभीर बीमारी का बिना चीरा लगाए हुआ सफल इलाज

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रायपुर। जशपुर के जैकुदर गांव की 8 वर्षीय स्वर्णि बाई लंबे समय से सांस लेने में परेशानी, बार-बार छाती में संक्रमण और तेज धड़कन जैसी समस्याओं से जूझ रही थी। स्कूल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘चिरायु’ के तहत हुई जांच के दौरान उसके हृदय से जुड़ी जन्मजात समस्या सामने आई। इसके बाद विशेषज्ञ इलाज के लिए उसे रायपुर रेफर किया गया, जहां बिना ओपन हार्ट सर्जरी के कैथेटर प्रक्रिया के जरिए उपचार किया गया। दुलदुला ब्लॉक की प्राथमिक शाला में पढ़ने वाली स्वर्णि की विस्तृत जांच में Large Type-A PDA यानी Patent Ductus Arteriosus की पुष्टि हुई। हृदय में मौजूद इस समस्या का आकार करीब 5.4 मिलीमीटर था, जिससे रक्त का प्रवाह प्रभावित हो रहा था। रायपुर के निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने स्थिति का आकलन करने के बाद ओपन सर्जरी के बजाय डिवाइस क्लोजर तकनीक से उपचार करने का फैसला लिया।

इलाज के दौरान 8/10 mm Lifetech Heart R PDA Occluder डिवाइस के जरिए PDA को सफलतापूर्वक बंद किया गया। प्रक्रिया के बाद जांच में डिवाइस सही स्थान पर मिला और रक्त के अनावश्यक रिसाव या रेजिडुअल शंट के संकेत नहीं मिले। बच्ची के हृदय की कार्यक्षमता भी सामान्य पाई गई। स्वास्थ्य स्थिर रहने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह सामान्य गतिविधियों की ओर लौट रही है। स्वर्णि के मामले में बीमारी की समय रहते पहचान और सही जगह रेफर किए जाने से उपचार संभव हो सका। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में लगातार सांस फूलना, जल्दी थक जाना, बार-बार छाती में संक्रमण या दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज होना जैसे संकेतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर स्वास्थ्य जांच कराने से जन्मजात हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान कर उचित उपचार कराया जा सकता है।