सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली की सभी इमारतों का सघन सर्वे, 3 दिन में मांगी रिपोर्ट; पुराने आंकड़ों पर उठे सवाल

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नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से सात लोगों की मौत और छह अन्य के घायल होने के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी की इमारतों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। निगम प्रशासन ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) को अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाली इमारतों का त्वरित और सघन निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से 10 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

हाईकोर्ट में दाखिल होगा हलफनामा
सत्य निकेतन हादसे के बाद मामले में न्यायिक स्तर पर भी जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। निगम की ओर से तीन दिनों में जुटाए जाने वाले निरीक्षण के आंकड़ों को संकलित कर 10 दिनों के भीतर दिल्ली हाईकोर्ट में विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाना है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

पुराने सर्वे के आंकड़ों पर सवाल
नए सर्वे के आदेश के बीच एमसीडी के इस साल की शुरुआत में कराए गए पिछले सर्वे के आंकड़े भी सवालों के घेरे में हैं। निगम के मुताबिक, उस दौरान राजधानी में कुल 27,84,286 यानी करीब 28 लाख इमारतों का सर्वे किया गया था। इनमें से सिर्फ 19 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया था।अब सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के अचानक ढहने और सात लोगों की मौत के बाद पुराने सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि जब राजधानी में करीब 28 लाख इमारतों का सर्वे किया गया था, तो खतरनाक इमारतों की संख्या महज 19 कैसे रही?

क्या जमीनी हकीकत सामने ला पाएगा नया सर्वे?
दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों, संकरी गलियों और पीजी व कोचिंग हब में बड़ी संख्या में बहुमंजिला निर्माण मौजूद हैं। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि तीन दिनों में कराया जाने वाला नया सघन निरीक्षण वास्तव में जर्जर, असुरक्षित और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों की पहचान कर पाता है या नहीं।सत्य निकेतन हादसे के बाद निगम की कार्रवाई से यह उम्मीद जरूर जगी है कि राजधानी में भवन सुरक्षा को लेकर व्यवस्था की खामियों को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, पुराने सर्वे के आंकड़ों पर उठे सवालों के बीच नए सर्वे की रिपोर्ट और उस पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें रहेंगी।