नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी द्वारा लिखे गए एक लेख को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया है। लेख में शिक्षण को केवल ज्ञान देने की प्रक्रिया के बजाय कला और रचनात्मक कार्य के रूप में देखने पर जोर दिया गया है।लेख में शिक्षकों की भूमिका को व्यापक बताते हुए कहा गया है कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे देश के भविष्य को तैयार करने और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
शिक्षण के लिए मानवीय जुड़ाव जरूरी
लेख के मुताबिक, एक प्रभावी शिक्षक बनने के लिए सिर्फ विषय का अच्छा ज्ञान होना पर्याप्त नहीं है। शिक्षक को विद्यार्थियों के साथ मजबूत मानवीय संबंध स्थापित करने, उनकी रुचियों और क्षमताओं को समझने तथा उनकी छिपी प्रतिभा को पहचानने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।शिक्षण को ऐसी कला बताया गया है, जिसमें प्रभावी शिक्षाशास्त्र के साथ-साथ विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों और संभावनाओं को समझना जरूरी है।
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शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण में अहम भागीदार मानने पर जोर
लेख में कहा गया है कि शिक्षकों को केवल कक्षा में पढ़ाने वाले व्यक्ति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्हें राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में पहचान और सम्मान मिलना चाहिए।विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ सोचने, समझने, रचनात्मकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई पहल
लेख में केंद्र सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए की जा रही विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, उल्लास और विद्यांजलि जैसी पहल
