11,639 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय से 2,616 से अधिक गांवों के विकास का लक्ष्य, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका पर जोर
नई दिल्ली । भारत सरकार का वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम सीमावर्ती गांवों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। कभी देश की दूरदराज की चौकियों के रूप में देखे जाने वाले ये गांव अब राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के महत्वपूर्ण साझेदार बन रहे हैं। कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, संपर्क व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, दूरसंचार और स्थानीय आजीविका के अवसरों को मजबूत किया जा रहा है।वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम के पहले और दूसरे चरण को मिलाकर 11,639 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय निर्धारित किया गया है। दोनों चरणों के माध्यम से भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाओं से लगे 2,616 से अधिक गांवों को विकास के दायरे में लाने का लक्ष्य है। सरकार का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे जीवंत, सशक्त और आत्मनिर्भर समुदाय विकसित करना है, जो स्थानीय स्तर पर बेहतर जीवन और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ सीमा सुरक्षा को भी मजबूत करें।
‘अंतिम गांव नहीं, ‘पहला गांव के दृष्टिकोण पर जोर
भारत सात पड़ोसी देशों के साथ 15,000 किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा साझा करता है। बांग्लादेश के साथ 4,096.7 किलोमीटर, चीन के साथ 3,488 किलोमीटर और पाकिस्तान के साथ 3,323 किलोमीटर की सीमा है। इसके अलावा भारत की सीमाएं नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान से भी लगती हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, कमजोर संपर्क व्यवस्था, सीमित बुनियादी ढांचे और रोजगार के कम अवसरों के कारण लंबे समय तक अनेक सीमावर्ती गांव अपेक्षाकृत अलग-थलग रहे। इसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों से पलायन हुआ और सीमावर्ती बस्तियां कम आबादी वाली होती गईं।
इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए वर्ष 2023 में वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम शुरू किया गया। इसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास कर उन्हें देश के विकास की मुख्यधारा से जोडऩा है। कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती निवासियों को सीमा सुरक्षा बलों की ‘आंख और कान के रूप में महत्वपूर्ण माना गया है।
यह पहल इन बस्तियों को देश के ‘अंतिम गांव के बजाय ‘पहला गांव मानने की सोच को दर्शाती है। सरकार का मानना है कि सशक्त और समृद्ध सीमावर्ती समुदाय सुरक्षित एवं मजबूत भारत की आधारशिला हैं।
दो चरणों में पूरा किया जा रहा सीमावर्ती विकास का अभियान
वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम-1 मुख्य रूप से उत्तरी सीमा से लगे गांवों पर केंद्रित है, जबकि वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम-2 को देश की अन्य अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाओं तक विस्तारित किया गया है।
दोनों चरणों का उद्देश्य जीवन स्तर में सुधार, स्थानीय रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करना तथा सीमावर्ती समुदायों को सशक्त बनाना है। अंतर केवल इनके वित्तपोषण और क्रियान्वयन की व्यवस्था में है। पहला चरण केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में राज्यों के सहयोग से लागू किया जा रहा है, जबकि दूसरा चरण पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
पहले चरण में 662 रणनीतिक गांव प्राथमिकता में
वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम-1 की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में उत्तरी सीमा से लगे गांवों के लिए की गई थी। इसे 10 अप्रैल 2023 को अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले के किबिथू में शुरू किया गया।इसके तहत अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख के 19 जिलों में उत्तरी सीमा से लगे 46 विकासखंडों के गांवों की पहचान की गई। इनमें लगभग 1.42 लाख की आबादी वाले 662 रणनीतिक गांवों को व्यापक विकास के लिए प्राथमिकता दी गई।वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक के लिए इस चरण में 4,800 करोड़ रुपये का परिव्यय स्वीकृत किया गया, जिसमें 2,500 करोड़ रुपये सड़क संपर्क के लिए निर्धारित किए गए हैं।कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती गांवों में हर मौसम में उपयोगी सड़कें, पेयजल, विश्वसनीय बिजली, मोबाइल और इंटरनेट संपर्क तथा स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पर्यटन सुविधाओं और बहुउद्देशीय सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर सुधारने पर भी जोर दिया गया है।
स्थानीय उत्पाद और पर्यटन को बढ़ावा
वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम में आजीविका विकास के लिए ‘हब एंड स्पोकÓ मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत सामाजिक उद्यमिता, युवाओं और महिलाओं के सशक्तीकरण, पर्यटन एवं स्थानीय संस्कृति के संरक्षण तथा ‘एक विकासखंड-एक उत्पादÓ आधारित उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विभिन्न सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़कर सीमावर्ती गांवों तक सुविधाएं पहुंचाने का यह मॉडल कार्यक्रम के दूसरे चरण में भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
दूसरे चरण में 1,954 गांवों का व्यापक विकास
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 अप्रैल 2025 को वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम-2 को मंजूरी दी। इसे गृह मंत्रालय द्वारा लागू किया जा रहा है। योजना को औपचारिक रूप से 20 फरवरी 2026 को असम के कछार जिले के नाथनपुर गांव से शुरू किया गया।वर्ष 2028-29 तक के लिए इस चरण में 6,839 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाओं से लगे 334 विकासखंडों में 1,954 गांवों को व्यापक विकास के लिए चिह्नित किया गया है। ये विकासखंड 15 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित हैं।
इनमें अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तथा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम-1 के अंतर्गत पहले से शामिल उत्तरी सीमा के विकासखंडों को दोहराव से बचने के लिए दूसरे चरण से बाहर रखा गया है।दूसरे चरण में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाएं, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और दूरसंचार के साथ सहकारी समितियों एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर जोर है। स्मार्ट कक्षाएं, पर्यटन परिपथ और सतत आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।
गांव कार्य योजनाओं के आधार पर होगा विकास
वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम का क्रियान्वयन गांव कार्य योजनाओं के माध्यम से किया जा रहा है। इन योजनाओं में सीमा, राज्य और गांव की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है।
कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी योजनाओं को एक साथ जोड़कर अधिकतम लाभ पहुंचाने का दृष्टिकोण अपनाया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में हर मौसम के अनुकूल सड़क संपर्क भी विकसित किया जा रहा है।
सीमावर्ती गांवों की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति आवश्यकता पडऩे पर योजना के दिशा-निर्देशों में उपयुक्त बदलाव की सिफारिश कर सकती है। गृह मंत्रालय इस कार्यक्रम का नोडल मंत्रालय है और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन तथा सीमा सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर योजना को लागू कर रहा है।
जुलाई 2026 तक 1,248 परियोजनाएं मंजूर
वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम-1 के तहत जुलाई 2026 तक गृह मंत्रालय ने 3,020.32 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली 1,248 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की ओर से 1,655 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अब तक 953.47 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जबकि उनके द्वारा 283 परियोजनाओं के पूरा होने की जानकारी दी गई है।
134 गांवों को पहली बार सड़क संपर्क से जोडऩे की योजना
सड़क संपर्क के क्षेत्र में 2,481.93 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली 111 सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से ऐसे 134 गांवों को सड़क से जोड़ा जाएगा, जहां पहले सड़क संपर्क उपलब्ध नहीं था।इन परियोजनाओं के तहत 35 लंबे पुलों को भी मंजूरी दी गई है। बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान होने के साथ बाजारों तक पहुंच बढऩे और सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को गति मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन बन रहा आय का नया माध्यम
वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम में पर्यटन को स्थानीय आय और रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है। पहले चरण के तहत 145 करोड़ रुपये की लागत वाली 327 पर्यटन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।इनमें दर्शनीय स्थल, साहसिक पर्यटन केंद्र, पारिस्थितिकी पर्यटन, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन स्थल, पदयात्रा मार्ग और पर्यटक केंद्र जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इनके माध्यम से स्थानीय प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को आर्थिक अवसरों में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
8,800 से अधिक गतिविधियों के जरिए ग्रामीणों तक पहुंच
31 जुलाई 2026 तक वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम के तहत 8,800 से अधिक गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं। इनमें जागरूकता अभियान, सेवा वितरण शिविर, स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा शिविर और कौशल प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शामिल हैं।अरुणाचल प्रदेश में 2,990, लद्दाख में 2,221, उत्तराखंड में 2,038, हिमाचल प्रदेश में 1,037 और सिक्किम में 530 गतिविधियां आयोजित की गईं।
सीमावर्ती गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम
वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती समुदायों को देश के विकास में सक्रिय भागीदार बनाना है। बेहतर बुनियादी ढांचा, सड़क और दूरसंचार संपर्क, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाएं, सरकारी योजनाओं का समन्वित लाभ तथा स्थानीय आजीविका के अवसर इन गांवों में विकास की नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं।सीमावर्ती पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलने से ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए स्रोत तैयार हो रहे हैं। सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे सीमावर्ती गांव अधिक जीवंत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेंगे, वे देश की सीमाओं को भी अधिक मजबूत बनाएंगे। इस प्रकार वाइब्रेंट विलेजेस कार्यक्रम 2047 तक सुरक्षित, समावेशी और विकसित भारत के संकल्प को जमीनी स्तर पर मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है।
