मथुरा। जन्माष्टमी पर अधिकतर श्रद्धालु बांके बिहारी और द्वारकाधीश मंदिर का रुख करते हैं, लेकिन मथुरा में एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है जहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधारानी नहीं, बल्कि उनकी परम भक्त कुब्जा की पूजा होती है। करीब 500 साल पुराना श्रीकृष्ण-कुब्जा मंदिर परिक्रमा मार्ग पर स्थित है और अपनी अलग पहचान के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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पौराणिक मान्यता के अनुसार, कुब्जा राजा कंस की दासी थीं और शारीरिक रूप से कुबड़ी होने के कारण समाज के तिरस्कार का सामना करती थीं। जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा पहुंचे, तो उन्होंने कुब्जा को स्नेहपूर्वक “सुंदरी” कहकर संबोधित किया और अपने स्पर्श से उनकी झुकी हुई कमर सीधी कर दी। कहा जाता है कि उसी क्षण उनका रूप भी निखर गया और वे श्रीकृष्ण की परम भक्त बन गईं। इसी घटना की स्मृति में इस मंदिर में श्रीकृष्ण के साथ कुब्जा की प्रतिमा स्थापित की गई है।
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मंदिर को लेकर एक लोकप्रिय धार्मिक मान्यता यह भी है कि यहां श्रद्धा से दर्शन और मंदिर के पवित्र जल से स्नान करने पर त्वचा संबंधी परेशानियों में लाभ मिलता है। हालांकि यह आस्था पर आधारित विश्वास है। यदि आप जन्माष्टमी के दौरान मथुरा की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो परिक्रमा मार्ग स्थित यह मंदिर आध्यात्मिक अनुभव के साथ शहर की धार्मिक विरासत को करीब से देखने का एक खास पड़ाव बन सकता है।
