भारत-बेल्जियम के बीच रक्षा, व्यापार और हरित ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर जोर

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नयी दिल्ली। भारत और बेल्जियम ने व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, हरित ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और लोगों के बीच परस्पर संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जतायी है तथा अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का भी लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत यात्रा पर आये बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ गुरुवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता की।

पिछले वर्ष फरवरी में पद संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। उनके साथ बेल्जियम के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन तथा अधिकारियों और उद्योग जगत का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।इसके बाद दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच पहले अकेले और बाद में प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता हुई। मोदी ने उनके सम्मान में दोपहर के भोजन का भी आयोजन किया।

दोनों नेताओं ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्लैंडर्स फील्ड्स में 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को याद किया। दोनों देशों ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी विश्वास, आर्थिक पूरकता और मजबूत जनसंपर्क के आधार पर संबंधों को और व्यापक तथा गहरा करने की इच्छा जतायी।उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर को केंद्र में रखते हुए प्रभावी और सुधार पर आधारित बहुपक्षवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को जरूरी बताया।


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बेल्जियम ने विस्तारित सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी के लिए समर्थन दोहराया। दोनों देशों ने गैर-स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी का समर्थन करने पर भी सहमति जताई। भारत 2028-29 और बेल्जियम 2037-38 के कार्यकाल के लिए उम्मीदवारी पेश करेगा।दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को भारत-बेल्जियम संबंधों का केंद्रीय आधार बताया और इसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया।

उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद के तहत हुई प्रगति का भी स्वागत किया। दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहरायी। उन्होंने जीवन विज्ञान, औषधि, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, रक्षा, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, लॉजिस्टिक्स, परिवहन, बंदरगाह, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, रसायन, उन्नत सामग्री, विनिर्माण, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी बात की।


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बेल्जियम के शहर एंटवर्प तथा मुंबई और सूरत के बीच लंबे समय से चले आ रहे हीरा व्यापार को भी महत्वपूर्ण बताते हुए दोनों देशों ने इस ऐतिहासिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जतायी। भारत-बेल्जियम निवेश फास्ट-ट्रैक तंत्र शुरू करने का स्वागत करते हुए दोनों नेताओं ने इसे द्विपक्षीय निवेश संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। बेल्जियम की संघीय होल्डिंग और निवेश कंपनी तथा भारत के राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष के बीच सहयोग को औपचारिक रूप देने की दिशा में भी आगे बढ़ने पर सहमति बनी।

बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने आतंकवाद, जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है, के खिलाफ भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने पिछले वर्ष अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर हुए आतंकवादी हमले की निंदा की। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ व्यापक वैश्विक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि आतंकवाद के किसी भी रूप और कहीं भी होने को उचित नहीं ठहराया जा सकता।


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उन्होंने आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों, उनके सुरक्षित ठिकानों तथा वित्तपोषण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया।दोनों देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए भारत-बेल्जियम संयुक्त कार्य समूह गठित करने की संभावना तलाशने की मंशा जताई। रक्षा सहयोग के क्षेत्र में दोनों रक्षा मंत्रालयों के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया गया। इसमें नियमित आदान-प्रदान, स्टाफ वार्ता, शिक्षा और प्रशिक्षण, अनुसंधान सहयोग तथा रक्षा औद्योगिक साझेदारी का ढांचा बनाया गया है।

दोनों नेताओं ने रक्षा विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, नवाचार, सह-विकास और सह-उत्पादन में सहयोग की संभावनाओं का स्वागत किया। बेल्जियम की ओर से भारत में रक्षा अताशे नियुक्त करने और भारत की ओर से ब्रसेल्स स्थित भारतीय दूतावास में स्थायी रक्षा अताशे नियुक्त करने के निर्णय का भी स्वागत किया गया। भारत के केंद्रीय जांच ब्यूरो और बेल्जियम की संघीय पुलिस के बीच अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और साइबर अपराध से निपटने के लिए समझौता ज्ञापन का भी स्वागत किया गया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग पर नए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया। इसके तहत हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, समुद्री पवन ऊर्जा, जैव ऊर्जा, लघु जलविद्युत और पंप भंडारण संयंत्रों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जायेगा। भारत और बेल्जियम ने हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में औद्योगिक साझेदारी और ज्ञान के आदान-प्रदान को भी बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, परिवहन, भंडारण और उपयोग की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जतायी।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारतीय कंपनियों, विश्वविद्यालयों और बेल्जियम के आईएमईसी के बीच सहयोग को गहरा करने का समर्थन किया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार में सहयोग का भी स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रभावी वीजा सेवाओं की जरूरत पर जोर दिया। भारत और बेल्जियम में राजनयिक मिशनों की वीजा प्रक्रिया क्षमता बढ़ाने और बेल्जियम की भारत में वीजा सेवा व्यवस्था को मजबूत करने का स्वागत किया गया।

मोदी ने बेल्जियम के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को भारत की नई शिक्षा नीति के तहत भारत में परिसर खोलने के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों ने कौशल विकास और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा तथा प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया के हाल के घटनाक्रम सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। यूक्रेन में युद्ध के संबंध में दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप संवाद और कूटनीति के माध्यम से व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के प्रयासों के समर्थन की पुष्टि की।

पश्चिम एशिया के संबंध में उन्होंने संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से चुनौतियों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और सुरक्षित तथा निर्बाध समुद्री परिवहन बनाए रखने की आवश्यकता भी रेखांकित की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने आपसी विश्वास और शांति, समृद्धि तथा विकास की साझा दृष्टि के आधार पर भारत-बेल्जियम साझेदारी को और गहरा तथा विविध बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने मोदी को पारस्परिक सुविधा के समय बेल्जियम की द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण दिया।