नई दिल्ली। भारतीय सेना ने लद्दाख की नुन कुन पर्वतमाला में 18,600 फीट की दुर्गम ऊंचाई पर एक साहसिक हेलिकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक गंभीर मरीज की जान बचाई। बर्फीली हवाओं, खड़ी ढलान और बेहद कम ऑक्सीजन जैसी कठिन परिस्थितियों के बीच पूरा हुआ यह अभियान सेना के पायलटों और क्रू की असाधारण दक्षता का उदाहरण बन गया। इतनी अधिक ऊंचाई पर हवा का दबाव कम होने से हेलिकॉप्टर की लिफ्ट क्षमता घट जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए सेना ने हेलिकॉप्टर का वजन कम करने के लिए गैर-जरूरी उपकरण हटाए और सीमित ईंधन के साथ मिशन की योजना बनाई, ताकि सुरक्षित उड़ान और एयरलिफ्ट सुनिश्चित हो सके।
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सबसे बड़ी चुनौती मरीज तक पहुंचने के बाद सामने आई, जहां उतरने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। ऐसे में पायलटों ने हेलिकॉप्टर को बेहद सटीक नियंत्रण के साथ संतुलित रखा। हेलिकॉप्टर का केवल एक स्किड बर्फीली ढलान को छू रहा था, जबकि क्रू ने कुछ ही सेकंड में मरीज को अंदर खींचकर सुरक्षित एयरलिफ्ट कर लिया। सफल अभियान के बाद भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने इस ऑपरेशन की तस्वीरें साझा करते हुए इसे विपरीत परिस्थितियों में टीमवर्क, तकनीकी कौशल और मानवीय प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। समय रहते मरीज को अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचा ली गई, जिससे यह मिशन सेना के सबसे चुनौतीपूर्ण बचाव अभियानों में शामिल हो गया।

