छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर ‘खजुराहो के मंदिर’ अपनी अलौकिक वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। अक्सर यह माना जाता है कि खजुराहो के मंदिरों में केवल कामुक (Erotic) और कामसूत्र से जुड़ी नक्काशियां हैं, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। कामुक कलाकृतियां यहाँ की दीवारों का महज 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा हैं, जबकि बाकी 85 प्रतिशत नक्काशी उस दौर के सामान्य जीवन, कला और गहरे अध्यात्म को दर्शाती है।
9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच चंदेल वंश के राजाओं द्वारा निर्मित इन मंदिरों की दीवारों पर तत्कालीन समाज की सजीव झलक मिलती है। पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियों में महिलाओं को बाल संवारते, श्रृंगार करते, पैरों से कांटा निकालते और संगीत की धुनों पर थिरकते दिखाया गया है। इसके अलावा, युद्ध के मैदान, हाथियों-घोड़ों की कतारें और राजाओं का वैभव भी बेहद बारीकी से उकेरा गया है।
अध्यात्म की दृष्टि से कंदरिया महादेव और लक्ष्मण मंदिर जैसे स्थलों पर भगवान शिव, विष्णु, ब्रह्मा और जगदम्बा माता के साथ-साथ ध्यानमग्न जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां धर्म और मोक्ष के मार्ग को दर्शाती हैं। कामुक नक्काशियों के पीछे की पौराणिक मान्यता यह है कि चंदेल वंश के संस्थापक चंद्रवरमन ने अपनी मां हेमवती के सपने को पूरा करने के लिए मानव जीवन के हर पहलू और तंत्र विद्या के सिद्धांतों को इन मंदिरों की दीवारों पर अमर कर दिया था।

