‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ टिप्पणी पर बढ़ा विवाद, प्रियंका गांधी से योग्यता पर सवाल: आईआईटी मद्रास डायरेक्टर के समर्थन में उतरे पूर्व सीईए

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नई दिल्ली। संसद में IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी को ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ कहे जाने के बाद राजनीतिक और अकादमिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि, किसी प्रतिष्ठित वैज्ञानिक के शोध पर टिप्पणी करने के लिए उनकी वैज्ञानिक या शैक्षणिक योग्यता क्या है। सुब्रमण्यम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, प्रो. कामाकोटी देश के अग्रणी वैज्ञानिकों में शामिल हैं और उनके शोध व उपलब्धियां स्वयं उनकी पहचान हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि, क्या प्रियंका गांधी ने उनकी रिसर्च पढ़े बिना ही सार्वजनिक टिप्पणी की।

उन्होंने यह भी कहा कि, विज्ञान का उद्देश्य किसी परिकल्पना की जांच करना है, उसका मजाक उड़ाना नहीं। उनके अनुसार, इतिहास में कई महत्वपूर्ण दवाएं पारंपरिक ज्ञान से विकसित हुई हैं, इसलिए किसी विचार को उसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के आधार पर खारिज करना उचित नहीं है। विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब लोकसभा में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने प्रो. कामाकोटी को ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ कहा।

उन्होंने समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए शिक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञता की जरूरत बताई। प्रो. वी. कामाकोटी जनवरी 2022 से IIT मद्रास के निदेशक हैं। कंप्यूटर साइंस, सूचना सुरक्षा और VLSI डिज़ाइन के विशेषज्ञ कामाकोटी 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं और कई राष्ट्रीय तकनीकी परियोजनाओं का नेतृत्व कर चुके हैं। उनके समर्थन और विरोध में आई प्रतिक्रियाओं के बीच यह मामला अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ अकादमिक विमर्श का भी विषय बन गया है।