कांकेर। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष चन्द्रहास नाग के अगुवाई में जिला चिकित्सालय से स्वास्थ्य कर्मियों ने रैली निकालकर अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री ,स्वास्थ्य मंत्री,सचिव के नाम एसडीएम एस बंजारे को ज्ञापन सौपा। संघ के अध्यक्ष ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों की शासन स्तर पर लंबित मांगो के निराकरण एवं स्वास्थ्य विभाग मे निजीकरण, ठेका प्रथा,आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने सहित अन्य मांग शामिल है। संघ के पदाधिकारियों ने जिला अस्पताल के सभा हाल में कार्यक्रम संचालित किया ।
जहां जिला अध्यक्ष नाग ने सभी पदाधिकारियों का उत्साह वर्धन कर जोश भरा। अस्पताल संघ के अध्यक्ष नंद ठाकुर ने कर्मचारियों के मांग को जायजा बताया। कार्यकारणी अध्यक्ष दीनबंधु सिन्हा ने बस्तर संभाग से हो रही ठेका प्रथा पर विस्तार पूर्वक जानकारी दिया। सचिव मनोज जोशी ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर जानकारी दी। परिचारिका प्रकोष्ठ जिला संयोजक प्रीती शार्मा,सीएचआ प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। संबोधन कार्यक्रम के बाद अस्पताल से रैली निकालकर संघ के पदाधिकारी कलेक्टोरेट पहुंचकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौपा। संघ द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा शासन को स्वास्थ्य कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान लागू किये जाने की मांग पर प्रस्ताव पूर्व मे भेजा गया है।
जिस संबंध में संघ द्वारा विगत कई वर्षो से संगठनात्मक गतिविधी के माध्यम से शासन को अवगत कराया जाता रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारियों की बहुप्रतिक्षित मांग पुनरीक्षित वेतनमान के संबंध में वर्ष 2023 मे अनिश्चित कालीन कामबंद आदोंलन भी किया गया था। शासन द्वारा सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन देने पश्चात् आंदोलन स्थगित किया गया था। आज दिनांक तक विभाग द्वारा भेजे गये प्रस्ताव पर किसी भी प्रकार का सकारात्मक पहल न किये जाने से कर्मचारी निराश एवं आक्रोशित है। संघ द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य कर्मचारियों के हित एवं विभागीय समस्याओं के संबंध मे भी पत्र के माध्यम से एवं समक्ष उपस्थित होकर चर्चा कर पूरा करने हेतु निवेदन किया जाता रहा है।
जैसे सस्थाओं की एक पाली मे ओ.पी.डी. अधार बेस अटेण्डेंस. पदनाम परिर्वतन. रेडियेशन भत्ता,जोखिम भत्ता,स्वास्थ्य संस्थाओं मे आवास की व्यवस्था, समय पर पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान दिये जाने, संविदा कर्मचारियों को विभाग के रिक्त पदो पर सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत पद आरक्षित किये जाने, संविदा कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतनमान के संबंध में निती निर्धारित करने आदि के संबंध मे शासन स्तर पर कोई भी सकारात्मक पहल किये जाने के संबंध में संघ को अवगत नही कराया गया है।
ज्ञापन सौपने वालों प्रमुख रूप से प्रीतम साहू,भुपेश्वरी रामटेके,ए आर बघेल,विशाल घोड़खदे,मनोज केशरी,अशोक नाग,रफीक खान,बीपी पटेल,कपिल सातपुते,मल्लिका पटेल,शांता नाग, सीएचओं प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पवन वर्मा,जेडीएस प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दुर्गेश मरकाम,डीएफएम प्रकोष्ठ के अध्यक्ष त्रिवेन्द्रम साहू,सीएचओ प्रकोष्ठ के महामंत्री आशुतोष जैन,भुमिका गुना,कौशल नागवंशी,प्रमोद यादव सहित महिला प्रकोष्ठ,सीएचओ प्रकोष्ठ,जीवनदीप समिति प्रकोष्ठ,डीएफएफ संघ के प्रकोष्ठ सहित अन्य पदाधिकारी व सदस्य शामिल थे।
एचएलएल कंपनी को बंद करने की मांग
संघ ने कहा है कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के लैब को एच.एल.एल. कंपनी को दिये जाने एवं अमृत फार्मेसी खोले जाने के संबंध आदेश प्रसारित होने से कर्मचारियों को विभाग का निजीकरण होने का अंदेशा हो रहा है तथा अपने भविष्य को लेकर कर्मचारी चिंतित है, जिस संबंध मे लगातार संगठन पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा संगठन को अपनी चिंता से लगातार अवगत कराया जा रहा है। कर्मचारियों की शासन स्तर पर लंबित मांग एवं निजीकरण,ठेका प्रथा,आउटसोर्सिंग के संबंध में संघ की प्रांत स्तरीय महासमिति के बैठक आयोजित किया गया था। जिसमे संगठन पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा निजीकरण,ठेका प्रथा,आउटसोर्सिंग से अपने भविष्य एवं विभाग के अस्तित्व के साथ-साथ होने वाले दुष्परिणाम के संबंध में अवगत कराया गया। विभाग के निजीकरण किये जाने से स्वास्थ्य सेवाओं के सार्वजनिक स्वभाव पर चोंट पहुचेगी एवं कर्मचारियों की नौकरी एवं भविष्य निश्चित रूप से असुरक्षित होगा साथ ही साथ स्वास्थ्य सेवाओं के गुणवत्ता पर प्रतिकूल पड़ सकता है।
पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग
संघ ने कहा कि छत्तीसगढ प्रदेश में हेल्थ सेक्टर से जुडे प्रदेश से बाहर के चिकित्सक,नर्स,पैरामेडिकल के लिए पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त किये जाने से छत्तीसगढ के हेल्थ सेक्टर मे भविष्य तलाश रहे युवाओं की चिंता से भी संगठन पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा संघ को अवगत कराया गया। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग मे कार्यरत हजारो कर्मचारियों अधिकारियों के बच्चे प्रशिक्षण लेकर अपना भविष्य हेल्थ सेक्टर मे तलाश रहे है। अन्य प्रदेश के लोगो के लिए छ.ग. मे पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त किये जाने से फर्जी डिग्री,डिप्लोमाधारियों की संख्या मे वृद्धि होने की आंशका भी जाहिर किया गया और फर्जी डिग्री डिप्लोमाधारियों के प्रवेश से राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पडने की संभावना बढ जायेगी।
ये प्रमुख मांग है शामिल
संघ ने कहा कि अपनी प्रमुख मांगों को लेकर गभीरतापूर्वक विचार करते हुए उचित एवं आवश्यक कार्यवाही किये जाने की मांग किया है। प्रमुख मांगों में शासन स्तर पर विभाग द्वारा स्वास्थ्य कर्मचारियों के वेतन के संबंध मे भेजे गये प्रस्ताव पर सकारात्मक कार्यवाही तत्काल किया जावे क्योकि 8 वॉ पे कमीशन लागू हो जाने पर कर्मचारियों को बडा आर्थिक नुकसान होने की संभावना है। शासन स्तर पर संघ द्वारा समय.समय पर पत्राचार के माध्यम से अवगत कराये गये लंबित मांगो पर कार्यवाही किया जावे। स्वास्थ्य विभाग को निजीकरण,ठेकाप्रथा,आउट सोर्सिंग से मुक्त रखा जावे क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओ पर प्रतिकूल प्रभाव पड सकता है।
प्रदेश मे हेल्थ सेक्टर मे कार्य करने वाले लोगो के लिए पंजीयन अनिवार्य किया जावे ताकि प्रदेश के प्रशिक्षित एवं प्रशिक्षण ले रहे चिकित्सक,नर्स,पैरामेडिकल के भविष्य सुरक्षित हो सके एवं फर्जी डिग्री,डिप्लोमाधारी का पहचान हो सके। विभाग के संस्थाओ में स्वीकृत सेटअप अनुसार सीधी भर्ती तत्काल प्रांरभ किया जाये क्योंकि प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थाओ मे लगभग 35 से 40 प्रतिशत पद रिक्त होने से स्वास्थ्य सेवाओ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विभाग मे कार्यरत संविदा,दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियो को समान कार्य समान वेतन हेतु स्पष्ट निती निर्धारण किया जाये।
प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थाओं मे जीवनदीप समिति के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों का अलग-अलग संस्थाओं मे अलग-अलग मानदेय दिया जा रहा है। पूरे प्रदेश मे एकरूपता के लिए स्पष्ट निती निर्धारण किया जावे ताकि जीवनदीप समिति के कर्मचारियो का आर्थिक शोषण रोका जा सके। प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थाओ मे कार्यरत ऐसे संविदा कर्मचारी,दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी जिसकी सेवा कि आवश्यकता सत्त लिया जायेगा उनका नियमित सेट्अप स्वीकृत किया जाये। स्वास्थ्य सेवाओ को सृदृढ एवं गुणवत्ता पूर्ण बनाये जाने कि दिशा मे प्रदेश मे स्वास्थ्य आयोग का गठन किया जाये। सहित अन्य मांग शामिल है।

